मोनो से आएगी मनी जब बस्ती होगी घनी, एमएमआरडीए को मिला सुझाव

खस्ता आर्थिक हालत से जूझ रहे मोनो परियोजना को उबारने के लिए एमएमआरडीए को `प्राइस वॉटर कूपर’ (पीडब्ल्यूसी) नामक संस्था ने `अजब’ सुझाव देते हुए कहा कि मोनो चलाना है तो शहर बसाना होगा। बताया जाता है कि उक्त संस्था के सुझाव पर वडाला स्थित मोनो कार डेपो अतिरिक्त जगह पर व्यावसायिक व निवासी कामों के लिए उपयोग करने का निर्णय मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण ने लिया है। इस संबंध में अभ्यास का काम पूरा हो गया है। डिपो की अतिरिक्त जगह पर तीन मंजिली इमारत बनाई जाएगी। इन इमारतों की बहुत-सी जगह व्यावसायिक कंपनियों को भा़ड़े पर दिया जाएगा तो कुछ जगह निवासी तत्व पर उपलब्ध होगी। बता दें कि एमएमआरडीए ने मोनो को अपने अधीन ले लिया है। इस परियोजना को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए एमएमआरडीए ने विभिन्न उपाय योजना खोज रही है। मोनो कार डिपो के मुख्य निर्माण कार्य के अलावा ६.९ हेक्टेयर जमीन खाली है। इसी खाली जगह पर व्यावसायिक व निवासी निर्माण कार्य करके किराए पर देकर मोनो को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया जा सकता है, ऐसी सलाह उक्त संस्था ने एमएमआरडीए को दी है। उक्त संस्था को अभ्यास करने की लिए एमएमआरडीए ने नियुक्त किया था। पीडब्ल्यूसी संस्था ने अपनी रिपोर्ट एमएमआरडीए को सौंप दी है जिसमें पीडब्ल्यूसी संस्था ने उक्त सुझाव के अलावा मोनो रेलवे स्टेशन, डस्बा और खंभे पर निजी विज्ञापन के खुला करने, टेलीकम्युनिकेशन माध्यम से मोनो स्टेशन पर मोबाइल कंपनियों को टॉवर बनाने की अनुमति देने, स्टेशन के छत पर सौर ऊर्जा यंत्र लगाकर उत्पन्न हुई अतिरिक्त ऊर्जा को बेचने आदि के सुझाव दिए हैं, उक्त जानकारी एमएमआरडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।