मोबाइल का नशा कोकीन जैसा

आजकल के माता-पिता छोटी उम्र में बच्चे को फोन चलाते देखकर उसे बेहद स्मार्ट समझते हैं लेकिन वे इसके नकरात्मक प्रभावों को नहीं जानते। चिकित्सकों का मानना है कि बच्चों के मोबाइल का नशा किसी नशेड़ी व्यक्ति के लिए कोकीन के नशे जैसा होता है। साथ ही एक ही अध्ययन में यह भी पाया गया है कि यदि नवजात शिशिुओं को मोबाइल फोन के संपर्क में रखा जाता है तो वे देरी से बोलना शुरू करते हैं।
बता दें कि बच्चों पर मोबाइल फोन के नकरात्मक प्रभावों को लेकर कई संस्थानों में अलग-अलग रिसर्च की गई है, जिनसे प्राप्त सभी परिणाम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नकारात्मक है। एम्स द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि लंबे समय तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर के खतरे को पैदा करता है। दक्षिणी कोरियाई वैज्ञानिकों का मानना है कि मोबाइल फोन बच्चों में ड्राई आईज की बड़ी वजह बन रहा है। इसी के साथ एक अध्ययन में यह भी पाया गया है कि जो छोटे बच्चे मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, वे देरी से बोलना शुरू करते हैं। दुनिया की जानी-मानी एडिक्शन थैरोपिस्ट भैंडी सालगिरी का कहना है कि बच्चों को स्मार्ट फोन देना एक नशेड़ी व्यक्ति को एक ग्राम कोकीन देने के बराबर है। मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सागर मुंदड़ा का कहना है कि मोबाइल फोन की आदत बच्चों की नींद खराब करती है, इससे बच्चों में ऊर्जा की कमी होती है और उनका किसी काम में मन नहीं लगता। इसके साथ ही मोबाइल एडिक्शन मुंबईकरों में बढ़ता जा रहा है, जिससे असली और काल्पनिक चीजों में दिमाग भ्रमित हो जाता है।