मोबाइल की लत से युवाओं में बढ़ा कमर और गर्दन दर्द की समस्या

मोबाइल और लैपटॉप का रोजाना घंटों गलत तरीके से इस्तेमाल युवाओं को कमर दर्द और गर्दन दर्द का मरीज बना रहा है। सफदरजंग अस्पताल में हुए कार्यक्रम में चिकित्सकों ने मरीजों पर अध्ययन को पेशकरते हुए यह जानकारी दी। अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसन विभाग की ओर से राजधानी दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में मरीजों पर अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में शामिल दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के ६० फीसदी लोग मस्कुलोस्केल्टन डिसऑर्डर से पीड़ित पाए गए।

शरीर में जोड़ों का दर्द मस्कुलोस्केल्टन डिसऑर्डर कहलाता है। अध्ययन से जुड़े डॉक्टर जुगल किशोर ने बताया कि यह शोध दिल्ली के ६ गांवों के २०० लोगों पर किया गया। इनमें ५४ फीसदी लोगों में कमर के नीचे के हिस्से में दर्द की समस्या देखी गई। सफदरजंग अस्पताल के कम्युनिटी मेडिसन विभाग के डॉक्टर वेंकटेश ने बताया कि उनके यहां कई ऐसे मरीज आते हैं जो लगातार कंप्यूटर और फोन को गलत अवस्था में बैठकर चलाने की वजह से कमर में नीचे ओर दर्द और सर्वाइकल दर्द के शिकार हो रहे हैं।

डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में काम करने वाले सौरभ आठ से दस घंटे मोबाइल पर लगे रहते हैं। कॉल, मैसेज, मेल, चैट और सोशल मीडिया पर उनका पूरा दिन निकल जाता है। सौरभ को पिछले कुछ दिनों से गर्दन में तेज दर्द की शिकायत है। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि उन्हें टेक्स्ट नेक सिंड्रोम हो गया है। उनकी गर्दन भी झुक गई है।

गंभीर बीमारी के संकेत
डॉक्टर वेंकटेश के मुताबिक लंबे समय तक गर्दन के दर्द को नजरंदाज करने से स्पाइनल कॉलम से निकलने वाली तंत्रिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे हाथों या पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। कई बार तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली बिगड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।