" /> मोबाइल को मार रहा है सेनेटाइजर

मोबाइल को मार रहा है सेनेटाइजर

सेनेटाइजर भले ही कोविड-१९ वायरस से लड़ने में कारगर हो पर स्मार्ट फोन की सेहत के लिए यह खतरनाक साबित हो रहा है। लोग स्मार्ट फोन को वायरस मुक्त करने के चक्कर में इन पर सेनेटाइजर का स्प्रे कर रहे हैं, जिससे इसकी सेहत बिगड़ रही है। मोबाइल के अंदरूनी हिस्सों में सेनेटाइजर जाने से इसका चार्जिंग, टच स्क्रीन, स्पीकर से लेकर डिसप्ले आदि खराब हो रहा है।
स्मार्ट फोन यूजर की संख्या आज लाखों में हैं। बाहर से आने पर कोरोना के संक्रमण के खतरों के बीच लोग स्मार्ट फोन पर सेनेटाइजर स्प्रे कर दे रहे हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में स्मार्ट फोन खराब हो रहे हैं। सर्वाधिक असर टच स्क्रीन के सेंसर पर दिख रहा है।
इसके साथ ही चार्जिंग, माइक, स्पीकर और डिसप्ले में खराबी आ रही है। कोरोना के बचाव में खराब हुए मोबाइल की मरम्मत को लेकर लोगों को ५०० से ३००० रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। कइयों को मोबाइल में सेनेटाइजर जाने से पूरा फोल्डर बदलना पड़ रहा है। इसमें २,२०० रुपए खर्च हो रहे हैं। इसके कारण कमोबेस हर टेक्निशियनों के पास रोजाना ४ से ६ स्मार्टफोन मरम्मत के लिए पहुंच ही रहे हैं। टेक्निशियनों का कहना है कि ‘कोरोना के खतरों को देखकर लोग मोबाइल के स्क्रीन और उसके पीछे सेनेटाइजर का स्प्रे कर दे रहे हैं। इससे लिक्विड चार्जिंग, स्पीकर, माइक को प्रभावित कर दे रहा है। इस कवायद में मोबाइल की सर्किट भी शार्ट हो जा रही है। मोबाइल के मरम्मत में ५०० से ३००० रुपए तक खर्च हो जा रहे हैं। चीनी उत्पादों का बहिष्कार बना मुसीबतकोरोना संकट के बीच सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव लोगों की मुसीबत और बढ़ा रहा है। मोबाइल की मरम्मत करनेवालों का कहना है कि ‘मोबाइल के अधिकतर पार्ट चीन से आते हैं। वर्तमान हालात में हर पार्ट्स की कीमतों में २० से ३० फीसदी का इजाफा हो गया है। एडवांस लेकर मरम्मत के लिए मोबाइल लेने की मजबूरी है। लोगों को दो से तीन दिन इंतजार करना पड़ रहा है।’ ऐसे में मोबाइल को खराब होने से बचाने के लिए ‘स्मार्ट फोन पर सीधे स्प्रे करना ठीक नहीं है। कॉटन कपड़ा या नैपकीन पेपर पर सेनेटाइजर स्प्रे करने के बाद स्क्रीन को साफ कर दें। यदि लगता है कि मोबाइल के अंदर लिक्विड चला गया है तो धूप में या टेबल लैंप के नीचे रख दें।’