मोबाइल चोरी का ‘लोकल’ अर्थशास्त्र, ६ साल में `१०० करोड़ की चोरी

मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल ट्रेनों में प्रतिदिन लाखों यात्री सफर करते हैं। इन यात्रियों से रेलवे प्रशासन को आमदनी तो होती है लेकिन इसी के साथ-साथ लोकल में मोबाइल चोरों का भी एक अर्थशास्त्र चलता है। लोकल में मोबाइल फोन चुरानेवाले लोग भी ज्यादातर लोकल यानी स्थानीय ही होते हैं। यात्रियों का मोबाइल फोन उड़ानेवाले ये मोबाइल हर साल करोड़ों रुपए के मोबाइल फोन चुरा लेते हैं। पिछले ६ वर्षों में लोकल में यात्रियों के मोबाइल फोन की चोरी के मामले में ३१ गुना बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है और मोबाइल चोरी का कारोबार १०० करोड़ तक पहुंच चुका है।
बता दें कि रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ), रेलवे पुलिस (जीआरपी) के तमाम प्रयासों के बावजूद यात्रियों के मोबाइल फोन चोर आसानी से उड़ा ले जाते हैं। नतीजतन पिछले ५ वर्षों में मुंबई की लोकल ट्रेनो में मोबाइल चोरी की वारदातों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। शकील शेख को आरटीआई के तहत रेलवे पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार पिछले ६ वर्षों में ५९,९०४ मोबाइल चोरी के मामले दर्ज हुए हैं। चुराए गए मोबाइल फोनों की अनुमानित कीमत लगभग सौ करोड़ (९९,४६,९६,९८१) तक आंकी गई है, जिनमें केवल ८,८६८ मोबाइल फोन ही पुलिस वापस ढूंढ़ने में सफल हो पाई। रेलवे पुलिस के अनुसार लोकल ट्रेनों में वर्ष २०१३ में १,०४५ मोबाइल चोरी के मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत १,४६,६४,५७० रुपए थी, इसी तरह वर्ष २०१४ में १५१८ मोबाइल चोरी के मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत २,१७,९१,६३७ रुपए आंकी गई थी। २०१५ में २०९२ मोबाइल चोरी के मामले सामने आए, जिनकी कुल कीमत ३५,४३,७८,८६४ रुपए थी। मोबाइल चोरों ने वर्ष २०१६ में २००९ मोबाइल फोनों पर हाथ साफ किया था, जिनकी कुल कीमत ३,८२,७२,८१७ रुपए थी। वर्ष २०१६ की तुलना में वर्ष २०१७ में मोबाइल चोरी के मामले १० फीसदी से ज्यादा बढ़ गए। २०१७ में २०,७६४ मोबाइल चोरी हुए, जिनकी कुल कीमत ३३,९६,०१,५८५ रुपए पहुंच गई। जो कि वर्ष २०१८ में ३२,४७६ मोबाइल फोन चोरी के मामलों के कारण ५४,४९,२८,४०८ रुपए हो गया। गौरतलब हो कि वर्ष २०१३ से २०१६ तक, केवल ६,६६४ मोबाइल फोन चोरी हुए थे, जबकि २०१७ से २०१८ के बीच महज २ वर्षों में चोरों ने ५३ हजार २४० मोबाइल चुरा लिए।