" /> मोहे नींद न आए…, अच्छी तरह से सो नहीं पाते भारतीय बच्चे

मोहे नींद न आए…, अच्छी तरह से सो नहीं पाते भारतीय बच्चे

भारतीय बच्चों की एक बड़ी परेशानी ऐसी है जिस पर माता-पिता पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। यह परेशानी है नींद की। एक सर्वे में यह बात सामने आई है कि भारत में बच्चे उचित नींद नहीं ले पाते। इससे उनके व्यवहार में बदलाव दिखाई पड़ता है। न सिर्फ बच्चे बल्कि कई घरों में वयस्क भी नींद की समस्या से जूझ रहे हैं। नींद पूरी न हो पाने से बच्चों व बड़ों के व्यवहार में काफी परिवर्तन देखने को मिलता है। आधी-अधूरी नींद लेकर उठनेवाले बच्चों में सुबह सुस्ती व थकान के लक्षण दिखते हैं, जिससे उनका विकास भी प्रभावित होता है। यह बात गोदरेज इंटरियो मैट्रेसज कंपनी के सर्वेक्षण में सामने आई है।
अगर इंसान की नींद पूरी नहीं हो तो उसके स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और इसका सबसे बड़ा कारण है खराब लाइफ स्टाइल जिसके चलते बच्चे रात १० बजे तक सो नहीं पाते। मैट्रेसेज बनानेवाली कंपनी गोदरेज इंटरियो मैट्रेसेज ने अपनी स्वास्थ्य जागरूकता पहल- ‘ेताज्ॅ१०’ के तत्वावधान में विश्व निद्रा दिवस पर महत्वपूर्ण आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि ६७ प्रतिशत भारतीय बच्चे जागने के बाद भी सुस्ती और थकान महसूस करते हैं। पिछले तीन वर्षों से बच्चों पर यह अध्ययन किया जा रहा है जिसने देश के बच्चों व वयस्कों में बढ़ती नींद की अस्वास्थ्यकर प्रवृत्ति को उजागर किया है।
आमतौर पर वयस्कों के साथ जुड़े नींद के अभाव के ये सभी पैटर्न भारतीय बच्चों और किशोरों में देखे जा रहे हैं। अध्ययन से पता चला कि ५८ फीसदी से अधिक उत्तरदाताओं ने कभी भी ेताज्ॅ१० नहीं किया या किया भी तो कभी-कभार, लगभग ३६फीसदी प्रतिदिन छह घंटे से कम सोते हैं। वास्तव में, सबसे खतरनाक तथ्य यह है कि मात्र २० प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ेताज् aू १०ज्स् की बात स्वीकार की। लगभग ४१ फीसदी उत्तरदाता बच्चों ने ‘स्क्रीन टाइम’, जिसमें टेलीविजन और फोन शामिल हैं, को उनके देरी से सोने का कारण माना और ४३ फीसदी उत्तरदाता बच्चों ने कहा कि वे आधी रात के बाद सोए थे जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रात के लगभग १० बजे सोने का परामर्श दिया है।
शोध निष्कर्षों पर टिप्पणी करते हुए, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्लीप साइंसेज के डॉ. अभिजीत देशपांडे ने कहा, ‘बच्चों और उनकी नींद की आदतें और पैटर्न माता-पिता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। स्वस्थ रहने के लिए, प्रतिदिन ७ से ८ घंटे सोने की सलाह दी जाती है। पर्याप्त और उचित नींद के बिना, शरीर साइटोकिन्स स्रावित नहीं करता है, जो कि एक प्रकार का प्रोटीन है जो संक्रमण और जलन को लक्षित करते हुए प्रभावी रूप से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है। नींद प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने और वायरस व बीमारी से बचाव का एक सबसे अच्छा तरीका है। समय पर सोना और शरीर को आवश्यक मात्रा में आराम देना बेहद जरूरी होता है। गोदरेज इंटेरियो मैट्रेस द्वारा कराए गए ेताज्ॅ १० अध्ययन के अनुसार, ५८ प्रतिशत से अधिक बच्चे कभी भी ेताज्ॅ१० नहीं करते हैं या फिर कभी-कभार ही करते हैं और ३६ प्रतिशत बच्चे ६ घंटे से कम नींद लेते हैं। यह राष्ट्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसके कारण, हमारे देश की अगली पीढ़ी को मोटापे, तार्किक क्षमता में कठिनाई, भावनात्मक असंतुलन और अन्य कई अन्य विकारों का खतरा हो सकता है।‘