मौत का खौफनाक मंजर!, एटम बम फूटते ही पलभर में निकल जाएगा दम २ करोड़ १० लाख लोग मारे जाएंगे

एटम बम का खतरा रहा है मंडरा
आधी दुनिया आ जाएगी चपेट में
बम फूटते ही करोड़ों लोगों की मौत
जो बचेंगे वो रेडिएशन से मारे जाएंगे
दुनिया की आधी ओजोन परत तबाह
हिंदुस्थान और पाकिस्तान के बीच तनाव बराबर बना हुआ है। मगर फिलहाल ऐसा भी नहीं कि दोनों देश खुद को जंग में झोंक दें। पर मान लें कि अगर दोनों देश जंग में कूद पड़ते हैं और फिर कहीं भारत-पाक के बीच परमाणु जंग शुरू हो गई तो क्या होगा? तस्वीर बेहद भयानक होगी। एक हफ्ते में ही २ करोड़ १० लाख लोग मारे जाएंगे। आधे से ज्यादा लोग बम की तपिश से झुलस जाएंगे। जो बचेंगे वो रेडिएशन से मारे जाएंगे। दुनिया की आधी ओजोन परत बर्बाद हो जाएगी। आधी दुनिया से सर्दी-गर्मी का मौसम ही खत्म हो जाएगा। दुनिया को परमाणु सर्दी तबाह कर देगी। वनस्पतियों और पेड़-पौधों के निशान तक मिट जाएंगे। आधी दुनिया के दो अरब लोग सिर्फ भूख से मर जाएंगे।
बात सिर्फ हिंदुस्थान और पाकिस्तान की नहीं है। दांव पर आधी दुनिया है। जी हां, अगर गलती से हिंदुस्थान-पाकिस्तान के बीच जंग होती है और उस जंग में दोनों देश अपने सिर्फ आधे परमाणु बम का ही बटन दबा दें तो हिंदुस्तान और पाकिस्तान में तो एक झटके में ही २ करोड़ १० लाख लोग मारे जाएंगे। मगर इसका असर न सिर्फ बाकी पड़ोसी मुल्कों बल्कि आधी दुनिया को भी झेलना पड़ेगा।
खौफनाक होगा असर
हिंदुस्थान और पाकिस्तान के पास जो परमाणु बम हैं, उनमें से हर बम हिरोशिमा पर गिराए गए १५ किलो टनवाले बम के बराबर है। ये बम जैसे ही गिरेंगे सबसे पहले इसकी गर्मी, तपिश और रेडिएशन लोगों को मारेगी। उसके बाद भी जो बच जाएंगे, उनके लिए जीना इतना आसान नहीं होगा। भोपाल गैस के तीस साल बाद आज तीसरी पीढ़ी भी बीमार पैदा हो रही है। फिर ये तो परमाणु बम है। अंदाजा लगाइए इसका असर कितना लंबा और खतरनाक होगा?
ओजोन परत बर्बाद
बमों के रेडिएशन का असर लोगों को सिर्फ तड़पाएगा ही नहीं बल्कि बाकी दूसरे तरीकों और नतीजों से भी उन्हें तिल-तिलकर मारेगा। वैज्ञानिकों की मानें तो इतने रेडिएशन से वायुमंडल में ओजोन परत बर्बाद हो जाएगी। अब वायुमंडल से ओजोन परत के गायब होने या बर्बाद होने का मतलब ये है कि हवा से वो गैस ही खत्म हो जाएगी, जो मौसम को बदलती है। यानी आधी दुनिया में सर्दी-गर्मी के फिक्स मौसम का सिलसिला ही बंद हो जाएगा। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि इस जंग के बाद ऐसी भयानक सर्दी पड़े कि दुनिया से वेजीटेशन यानी पेड़-पौधों का नामो-निशान ही मिट जाए। ऐसे में इंसानों की हालत क्या होगी ये समझा जा सकता है!
वैज्ञानिकों की मानें तो दोनों देशों के बीच एटमी जंग की सूरत में २ करोड़ १० लाख लोगों की मौत तो पहले ही हफ्ते में हो जाएगी। मौतों का ये आंकड़ा दूसरे विश्वयुद्ध में मारे गए लोगों की तादाद के मुकाबले आधी होगी। इतना ही नहीं, मौत का ये आंकड़ा हिंदुस्थान में पिछले ९ सालों में आतंकवादी हमलों में मारे गए आम लोगों, पुलिस, जवान और सुरक्षाबलों की कुल तादाद से २ हजार २२१ गुना ज्यादा होगी। कहने का मतलब है कि इस वक्त आतंकवादी इंसान और इंसानियत को जितना नुकसान पहुंचा रहे हैं, परमाणु युद्ध उससे २ हजार गुना ज्यादा इंसानों की जान लेगा।
हालत ये होगी कि दुनिया के एक बड़े इलाके से पेड़-पौधों और वनस्पतियों का नामो-निशान तक मिट जाएगा। वेजीटेशन यानी पेड़-पौधों का नामो-निशान भी खत्म हो जाएगा। और सिर्फ इसी वजह से लगभग २ अरब लोग भूख से मारे जाएंगे। ये आंकड़े २०१३ में भौतिक वैज्ञानिकों के अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने परमाणु युद्ध रोकने के लिए किए गए एक अध्ययन के बाद जारी किए थे।