मौत का ब्रिज चल रहे हैं ठाणेकर

ठाणे और कलवा को जोड़नेवाले अंग्रेजों के जमाने के ब्रिज को ठाणे मनपा द्वारा खतरनाक घोषित कर बंद कर दिया गया था लेकिन ठाणेकरों ने इस ब्रिज का इस्तेमाल पुन: शुरू कर दिया है। प्रशासन को इसकी भनक भी नहीं है। यदि दुर्भाग्यवश यह ब्रिज गिर जाता है तो कई ठाणेकरों को अपनी जान गंवानी पड़ सकती है।
बता दें कि वर्ष २०१६ में महाड स्थित सावित्री नदी का पुल बह गया था, जिसके बाद से ही ठाणे मनपा ने ठाणे और कलवा शहर को जोड़नेवाले १५० वर्ष पुराने ब्रिज को खतरनाक घोषित कर दिया था। इसलिए पिछले तीन वर्षों से ठाणे से कलवा जाने के लिए नागरिक मनपा द्वारा इस ब्रिज के बगल में बनाए गए ब्रिज का इस्तेमाल कर रहे थे। लेकिन मनपा प्रशासन द्वारा बनाया गया यह ब्रिज काफी ऊंचाई पर है और साथ ही में ब्रिज पर लगाई गई टाइल्स भी उखड़ चुकी है। नागरिकों को इस ब्रिज पर चलने में डर लगता है इसलिए नागरिक अंग्रेजों द्वारा बनाए गए पुल से जाना पसंद करते हैं।
कलवा प्रभाग समिति के सहायक आयुक्त विजय कुमार जाधव ने बताया कि नागरिक खतरनाक ब्रिज पर न चलें इसलिए मनपा ने ब्रिज पर ग्रिल लगाया था। नागरिकों ने ग्रिल तोड़ दिया होगा। जल्द ही और मजबूत ग्रिल लगा दी जाएगी, साथ ही मनपा द्वारा बनाए गए ब्रिज की जांच कर मरम्मत की जाएगी।
 १५० वर्ष पुराना है ब्रिज
 २०१६ में खतरनाक घोषित
 खतरे में ठाणेकरों की जान