मौत की मिथेन! मीरा-भाइंदर में ३ की मौत

मीरा-भाइंदर में कल मिथेन गैस का कहर देखने को मिला। इस जहरीली गैस ने ३ मजदूरों की जान ले ली। ये मजदूर महानगरपालिका के मीरा रोड-पूर्व प्रेमनगर म्हाडा परिसर में स्थित एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) में सफाई करने गए थे। वहां प्लांट में एक वॉल्व बंद हो गया था, जिसे ये खोल रहे थे। वॉल्व के खुलते ही मिथेन गैस का जोरदार रिसाव हुआ और इनकी मौके पर ही जान निकल गई। एक मजदूर को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिस कंपनी ने सफाई का यह ठेका लिया है उसके खिलाफ मनपा आयुक्त ने आपराधिक मामला दर्ज कराने का आदेश दिया है।

मीरा-भाइंदर में कल दोपहर १.३० बजे के आस-पास यह हादसा हुआ। मृतक सफाई मजदूरों की पहचान मुजफ्फर मोलीक (२४), रफीक मंडल (५०), मोफीजुम (१८) तथा घायल मजदूर अख्तर मुल्ला (१७) के रूप में हुई है। सभी मजदूर मूलरूप से बंगाल के रहनेवाले हैं, जिन्हें एसटीपी (मल निस्सारण केंद्र) के एसपीएमएल कंपनी के ठेकेदार ने सफाई के लिए चौराहे से बुला कर लाया था। घटनास्थल पर पहुंचे मनपा आयुक्त बालाजी खतगावकर और महापौर डिंपल मेहता का स्थानीय निवासियों ने घेराव कर खरी-खोटी सुनाई। खतगावकर ने हादसे के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। काशीमीरा पुलिस ने आकस्मिक दुर्घटना का मामला दर्ज कर मामले की जांच कर रही है। मनपा आयुक्त खतगावकर ने शहर अभियंता शिवाजी बारकुंड को जांच कर एसपीएमएल इंप्रâा.प्रा.लि. कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराने का आदेश दिया है।
मीरा-भाइंदर में एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) की सफाई करने उतरे ३ मजदूरों की मौत जहरीली गैस के जंजाल में फंसने से हो गई। मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रकाश बोराडे ने बताया कि एसटीपी में जाम हो चुके पाइप लाइन के वॉल्व को खोलने के लिए तीन मजदूर सीवरेज टंकी में उतरे थे। वॉल्व खुलते ही उसमें से जहरीली मिथेन गैस का रिसाव हुआ जिसकी चपेट में आने से तीनों की टंकी में ही मौत हो गई, जबकि चौथा मजदूर बेहोश होकर टंकी से बाहर ही गिरा हुआ था। उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। मनपा अग्निशमन विभाग के मास्कधारी कर्मचारियों ने टंकी में उतरकर तीनों के शव बाहर निकाले।
जिस जगह पर यह एसटीपी बनाया गया है, वह म्हाडा परिसर के इमारतों के मध्य स्थित है तथा १,९८६ के विकास नक्शा (डीपी प्लान) में स्कूल और खेल के मैदान के लिए आरक्षित दर्शाई गई थी। वर्ष २०१० में मनपा ने इसका आरक्षण बदल कर यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया, जिसका स्थानीय निवासियों ने भारी विरोध किया था। यहां तक कि मनपा से न्याय नहीं मिलने के बाद स्थानीय निवासियों ने वर्ष २०१२ में मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
एसटीपी के मुख्य कार्यकारी अभियंता सुरेश वाकोडे ने दिसंबर २०१७ में स्थानीय निवासियों को इस प्लांट की कार्य प्रणाली का डेमो दिखाकर इससे किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचने व दुर्गंध नहीं आने का दावा किया था। इस आशय का शपथ पत्र भी न्यायालय में सादर किया था। इसके बाद प्रायोगिक तौर पर इस प्लांट को शुरू किया गया था।

विरोध के बावजूद बना प्लांट
राजू भोईर : इस प्लांट का शुरू से ही स्थानीय निवासियों ने विरोध किया था। इस प्लांट के पास स्थित राजमुद्रा, ओंकार, प्रेम नगर, अक्षत आदि के निवासी इस प्लांट से निकलनेवाली बदबू से परेशान हैं। कई बार मनपा प्रशासन से इसकी शिकायत की गई लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। प्लांट में कार्य करनेवाले जानकार और गैस मास्क जैसे स्वास्थ्य उपकरणों से लैस सफाई मजदूर होते तो उनकी मौत नहीं होती। इस हादसे के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

चंद्रकांत पाटील : शुरू से ही स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया था। यह जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए उपयुक्त नहीं थी लेकिन मनपा के कार्यकारी अभियंता सुरेश वाकोडे ने किसी की नहीं सुनी। आज इस प्लांट से निकलनेवाली बदबू से सभी परेशान हैं। नियमत: ऐसे प्लांट रहिवासी परिसर से कम से कम ५०० मीटर की दूरी पर होने चाहिए।

नाराज स्थानीय रहिवासी जगदीश सिंह : मैं बगल के अक्षत इमारत में रहता हूं। इस प्लांट से निकलनेवाली तेज बदबू के कारण हमें हमेशा दरवाजे -खिड़की बंद रखने पड़ते हैं। इस प्लांट में कोई गेट (मुख्य दरवाजा) नहीं लगाया गया है। कोई जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी भी यहां नहीं रहता। प्लांट खुला होने के कारण आस-पास के बच्चे यहां खेलने चले जाते हैं, जिससे भविष्य में ऐसी हादसा की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।