मौत के मुहाने पर कुर्ला, कल्याण, ठाणे

मुंबई में रेल हादसों की जद में आकर सालाना हजारों लोग अपनी जान गवां बैठते हैं। ट्रेसपासिंग, लोकल की छत पर यात्रा, भीड़ के दौरान ट्रेन से गिरने जैसे हादसों को रोकने के लिए रेलवे तमाम दावे करती है लेकिन मौत का यह आंकड़ा कम होने की बजाए बढ़ता ही जा रहा है। जबकि इन हादसों को रोकने के लिए करोड़ों रुपए ट्रेसपासिंग योजना के तहत रेलवे फूंक रही है। साल २०१९ के शुरुआत के दो महीनों में कुर्ला, कल्याण और ठाणे स्टेशन सफर करनेवाले यात्रियों के लिए मौत के मुहाने पर रहा है।
बता दें कि साल २०१९ के जनवरी और फरवरी महीने में कुर्ला में ६९, कल्याण में ४८ और ठाणे में ४८ लोगों ने अपनी जान गवाई हैं। दो महीनों में सबसे अधिक मौतें इन्हीं स्टेशन पर हुई हैं। नए वर्ष २०१९ के दो महीनों में कुल ४१७ लोगों ने मुुंबई लोकल की चपेट में आकर अपनी जान गवां दी। इनमें ४३ महिला और ३७४ पुरुष शामिल थे, वहीं इन दो महीनों में ४०० लोग घायल हुए। इनमें ३२४ पुरुष और ७३ महिला शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में जा रही लोगों की जान के बावजूद कहीं कोई बड़ी हलचल नजर नहीं आ रही। इस बारे में रेलवे एक्टिविस्ट भावेश पटेल कहते हैं कि हादसे बुरे होते हैं, नहीं होने चाहिए। मैं दावे के साथ कहता हूं कि अगर रेलवे के अधिकारी गंभीरता से मौतें रोकना चाहें तो इनमें भारी कमी आ सकती है।
२०१८ में कुल २,९९३ लोगों ने जान गंवाई। इनमें से २,६५५ पुरुष और ३३७ महिलाएं शामिल हैं। इसके साथ ही ३,३०७ लोग घायल हो गए। इनमें २,६१४ पुरुष और ५९६ महिलाएं शामिल हैं। रोज १० लोागों की मौत एक बड़ा हादसा है।
स्टेशनों पर हुई मौतें
अंधेरी १५, बांद्रा २०, बोरीवली २७, चर्चगेट ५, कुर्ला ६९, सीएसटीएम २१, दादर में २४, डोंबिवली २८, कल्याण ४८, कर्जत में ०, मुंबई सेंट्रल २४, पालघर में १८, पनवेल ८, ठाणे ४८, वाशी २४, वसई २७ और वड़ाला में ११ लोगों ने जान गंवाई।