मौत बांटने में ‘मरे’ अव्वल

मुंबई के उपनगरीय रेल मार्ग पर विभिन्न रेल हादसों में रेल यात्रियों की रोजाना मौत होती है। इन हादसों को रोकने के लिए रेलवे समय-समय पर उपाय योजनाओं को भी अमल में लाती है लेकिन उसकी ये योजनाएं महज काले कंबल पर रंग चढ़ने जैसा प्रतीत हो रही हैं। साल २०१८ के नवंबर तक उपनगरीय रेल मार्ग पर २,७३४ लोगों की मौत हुई है। सबसे अधिक मौत मध्य रेलवे में हुई है, जिससे साल २०१८ में भी मध्य रेलवे मौत बांटने में अव्वल रही है।

रेलवे पुलिस कमिश्नर ऑफिस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक साल २०१८ में नवंबर तक कुल २,७३४ लोगों की विभिन्न रेल हादसों में मौत हुई है। सबसे अधिक १,४७६ मौतें पटरी पार करने से हुई हैं जबकि ट्रेन से गिरकर ६५० लोग इस साल मरे हैं। वहीं सिग्नल खंभे से टकराकर १८, गैप में गिरकर ६, करंट लगने से २०० लोग मरे हैं। इसी तरह उपनगरीय रेल मार्ग पर ३१ लोगों ने सुसाइड कर अपनी जीवनलीला समाप्त की है। पटरी पार करने व ट्रेन से गिरकर मरनेवाले लोगों की संख्या के बाद ४९१ लोग बीमारी के चलते रेल परिसर में आकस्मिक मौत का शिकार हुए हैं।