मौत बेचने वाला बना सपनों का सौदागर, झोलझाल में हुआ अंदर

मुंबई में अपने घर का सपना देखने देखनेवालों को एक ठग सस्ते में म्हाडा का मकान दिलाने का झांसा देता था। उक्त ठग किसी और के नाम का मकान फर्जी दस्तावेज बनाकर दूसरों को बेचता था। मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने जब ऐसा ही एक मकान दो लोगों को बेचने के आरोप में उक्त ठग को उसके साथी के साथ गिरफ्तार किया तो पता चला कि वह अतीत में ड्रग्स तस्कर भी रह चुका है। पुणे पुलिस ने उसे नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

बता दें कि किराए के मकान में रहनेवाले पंकज(काल्पनिक नाम) को एक ठग ने म्हाडा के अधिकारियों से पहचान का झांसा दिया। वर्ष 2015 में उक्त ठग ने विक्रोली के कन्नमवार नगर स्थित म्हाडा के मकान दिलाने के नाम पर पंकज से 23 लाख रुपए ले लिए। जबकि म्हाडा की पुरानी  इमारतों के पुनर्वास के दौरान सन्क्रमण शिबिर में आबंटित किसी और निवासी का मकान पंकज को बेच दिया। पंकज जब उक्त मकान में रहने पहुंचा तो पता चला कि उक्त ठग एक दिन पहले वही मकान 15 लाख रुपए में संदीप (काल्पनिक नाम) नामक एक अन्य शख्स को भी बेच चुका है। पंकज ने इसकी शिकायत विक्रोली पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक सूनील बाजारे के मार्गदर्शन तथा एपीआई लक्ष्मीकांत सालुंखे के नेतृत्व में प्रॉपर्टी सेल की टीम ने मामले की जांच शुरू की। जांच करने पर पता चला कि उक्त मकान असल में जिस व्यक्ति के नाम पर आबंटित है, वह कहीं और रहता है, जबकि बेचनेवाले ठग ने फर्जी दस्तावेजों देकर पंकज और संदीप को मूर्ख बनाया है। 3 साल की मशक्कत के बाद टीम ने 21 दिसंबर को अरविंद रतनलाल खेडसिया को कान्दीवली-पूर्व के पोइसर स्थित उसके निवास से तथा हरीश बाबूलाल जैन को दक्षिण मुंबई के गिरगांव स्थित निवास से गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि अरविंद को पहले भी म्हाडा के मकान दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसी तरह पुणे पुलिस ने उसे ड्रग्स की तस्करी के आरोप में पकड़ा था जबकि उसके खिलाफ रेलवे पुलिस थानों में भी दो मामले दर्ज हैं। वहीं हरीश पर फर्जी दास्तावेजों के सहारे बैंकों में खाता खुलवाने और उन खातों में अरविंद द्वारा पीड़ितों से लिए गए चेक भुनाने का आरोप है। कोर्ट ने आरोपियों को 26दिसंबर तक पुलिस हिरासत में रखने का आदेश दिया है।