मौलवियों का मेकओवर!, अलिफ, बे, ते, से छोड़, पढ़ेंगे ए बी सी डी…

दीनी तालीम का ईदारा (स्कूल) बने मदरसों में पढ़नेवाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने की कवायद शुरू हो गई है। मदरसों के बच्चों को मॉडर्न एजुकेशन देने पर केंद्र सरकार ने अब जोर दिया है। इन्हें मॉडर्न एजुकेशन से जोड़ने से पहले इनके शिक्षकों यानी मदरसों के मौलवियों का मेकओवर किया जाएगा। इसके तहत मौलवियों को अब अरबी तालीम ‘अलिफ, बे, ते, से’ छोड़ अंग्रेजी तालीम ‘ए, बी, सी, डी’ पढ़ाई जाएगी। प्रसिद्ध संस्थानों के माध्यम से मदरसों के मौलवियों को अंग्रेजी, विज्ञान, कंप्युटर, इंटरनेट आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद मौलवी मॉडर्न एजुकेशन का पाठ मदरसों में बच्चों को पढ़ाएंगे ताकि ये बच्चे स्मार्ट एजुकेशन प्रणाली से जुड़ सकें। सच्चर कमिटी की मानें तो कुल मुस्लिम आबादी के पांच प्रतिशत बच्चे मदरसे में दीनी तालीम हासिल करते हैं। देशभर में करीब एक लाख मदरसे हैं जिसमें १० लाख मौलवी बच्चों को दीनी तालीम देते हैं। इसमें नमाज, हदीस, धार्मिक ग्रंथ कुरान और इस्लाम की बारीकियां बताई जाती हैं। मौलवियों को मॉडर्न एजुकेशन मिलने से मदरसों के बच्चे भी मुख्यधारा में आ पाएंगे और वे भी विकास से जुड़ पाएंगे। दरअसल, देशभर में चलनेवाले मदरसों में लाखों विद्यार्थी तालीम लेते हैं। मगर सिर्फ धार्मिक तालीम लेने से आगे चलकर वहां पढ़नेवाले बच्चे पिछड़ जाते हैं। मुख्यधारा की शिक्षा नहीं मिल पाने से ऐसा होता है। इसके लिए एक अरसे से मुस्लिम समाज के ही एक वर्ग मांग कर रहा था कि मदरसों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ा जाए ताकि ये बच्चे विभिन्न नौकरियों में देश के आम बच्चों के साथ कंपीट कर सकें।
मदरसों के मौलवियों के साथ-साथ बच्चों को मॉडर्न एजुकेशन से जोड़ने की तैयारी केंद्र सरकार ने की है। इसके तहत मौलवियों और बच्चों का मेकओवर कर उन्हें अंग्रेजी का भी पाठ पढ़ाया जाएगा। सरकार के इस मेकओवर को मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने भी अपनी मंजूरी दी है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के गठन के समय ‘सबका साथ-सबका विकास’ के साथ-साथ ‘सबका विश्वास’ का नया संकल्प लिया था। इसी के तहत अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने के लिए उनके विकास पर सरकार जोर दे रही है। इसकी शुरुआत मदरसों से शुरू की जा रही है। मदरसों में अरबी की पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को अंग्रेजी, विज्ञान, कंप्युटर, इंटरनेट, ई-लर्निंग का ज्ञान देकर उन्हें स्मार्ट एजुकेशन से जोड़ने में सरकार जुट गई है। सरकार के इस कदम की सराहना मुस्लिम तंजीमों के साथ-साथ मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग कर रहे हैं। मुस्लिम बुद्धिजीवी डॉ. एच आर. अंजारिया ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार सबका विश्वास जीतने में जुट गई है। पढ़ाई के साथ-साथ अगर मदरसों को आर्थिक मदद भी मिले तो इन बच्चों का जरूर विकास होगा। ऑल इंडिया उलेमा काउंसिल के महासचिव मौलाना मेहमूद दरियाबादी ने कहा कि सरकार पढ़ाई के साथ-साथ मुसलमानों के आर्थिक विकास पर भी ध्यान दे। मदरसों में सिर्फ चार प्रतिशत ही बच्चे पढ़ते हैं। ९६ फीसदी बच्चे स्कूल-कॉलेज में पढ़ते हैं। स्कूल के साथ-साथ मदरसों में भी ड्रॉप आउट के प्रमाण अधिक हैं। ०.२ प्रतिशत ही बच्चे मदरसे से मुफ्ती बनते हैं। मॉडर्न एजुकेशन के साथ-साथ आर्थिक मदद से बच्चों का विकास होगा। मदरसा जामिया कादरिया अशरफी के संस्थापक मौलाना मोईन मियां ने सरकार के कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ मॉडर्न एजुकेशन भी मिले तो एक मुफ्ती हाफिज, डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेगा।