म्हाडा का मॉनसून दुखड़ा

दक्षिण मुंबई में स्थित म्हाडा इमारतों का मॉनसून से पहले किया गया सर्वे वहां के स्थानीय निवासियों के लिए दूसरे लोगों को दुखड़ा सुनाने की वजह बन गया है। म्हाडा द्वारा किए गए सर्वे में २३ इमारतों को अत्यंत खतरनाक बताया गया है। इन २३ इमारतों में रहनेवाले ८१५ परिवारों के लिए यह एक बहुत बड़ी समस्या की वजह बन गई है।
बता दें कि म्हाडा द्वारा प्रतिवर्ष मॉनसून से पहले सभी इमारतों का सर्वे किया जाता है। वर्ष २०१८ में म्हाडा की ७ इमारतों को अत्यंत खतरनाक बताया गया था। इस साल यह आंकड़ा तीन गुना से भी अधिक है, जबकि साल २०१६ और २०१७ में ११ और ९ इमारतों को अत्यंत खतरनाक बताया गया था। इन २३ म्हाडा इमारतों के ८१५ किराएदारों में से ५०७ निवासी हैं जबकि अन्य ३०८ कारोबारी मकान हैं। सभी निवासियों का म्हाडा पुनर्वसन करेगी, जबकि वहां व्यापार कर रहे लोगों को खुद अपने लिए नया स्थान ढूंढ़ना पड़ेगा। मुंबई रिपेयर एंड रिकंस्ट्रक्शन बोर्ड के चेयरमैन विनोद घोसालकर ने बताया कि इन ५०७ निवासी परिवारों के लिए गोराई में रहने की व्यवस्था की जाएगी। यदि वो इमारत खुद से खाली नहीं करते हैं तो उन्हें जबरदस्ती वहां से हमें निकालना होगा क्योंकि ये इमारतें बेहद खतरनाक हैं। ऐसे में लोग दक्षिण मुंबई छोड़कर गोराई नहीं जाना चाहते। लोगों का कहना है कि गोराई रहने पर उनके लिए रोजाना ऑफिस जाना और उनके बच्चों के लिए स्कूल जाने की समस्या होगी।
२३ इमारतें खतरनाक
मॉनसून से पहले करना होगा खाली
म्हाडा निवासियों को जाना पड़ेगा गोराई