" /> यस बैंक, कोरोना और शेयर बाजार

यस बैंक, कोरोना और शेयर बाजार

अभी पिछले हफ्ते आपने हिंदुस्थान ही नहीं पूरे दुनिया के शेयर बाजार में मचे कोहराम को देखा। दुनिया के शेयर बाजार में मचा कोहराम कोरोना के कारण तो हुआ ही लेकिन हिंदुस्थान में इसमें एक कारण और जुड़ गया। वह है यस बैंक की घटना। शेयर बाजार में इस तरह की बड़ी गिरावट यह प्रदर्शित करता है कि यह बाजार कितना संवेदनशील है जो व्यापार के वास्तविक कारणों के अलावा भी बाहरी अन्य कारण जो की संवेदनशील है, से भी बहुत प्रभावित होता है।
यस बैंक की घटना आज के आधुनिक बैंकिंग के कुप्रबंधन की निशानी है, जहां बैंक का उच्च प्रबंधन ही इसमें लिप्त पाया गया हो। साधारणतया बैंकों में पैसा मध्य वर्ग का जमा रहता है, यस बैंक की घटना तो ऐसा लग रहा है कि मध्य वर्ग के पैसे और डिफाल्टर रिच लोगों के बीच का यह प्लेटफॉर्म बन गया था। ऐसे बहुत ही कम उदाहरण मिलेंगे जहां बैंक का एमडी स्तर का अधिकारी इस तरह के ऋण वितरण में शामिल हो, यह पूरी तरह से कॉर्पोरेट गवर्नेंस का फेलियर है। यह ऋण वितरण के मनमाने एवं बिना किसी जांच-परख के सुविधानुसार ऋण बांटने का नतीजा है। यह ऋण के नाम पर घूस खाने का एवं डमी कंपनियों के निर्माण के द्वारा जमाकर्ताओं के पैसे को ऋण वितरण के नाम पर घुमाकर वापस लेने जैसे गलत कार्यों का नतीजा है। यह नॉन बैंकिंग गैर जरूरी भुगतान जैसे कि पेंटिंग जैसे वस्तुओं के लिए करोड़ों रुपए भुगतान करने का नतीजा है। ऑडिटर की नियुक्ति, पुराने को हटाना, उसके द्वारा दिया गया कोई रेड फ्लैग एवं एनपीए की रिपोर्टिंग अब सब जांच के दायरे में हैं। आरबीआई के द्वारा निष्पादन में कहां कमी आई कि वह लगातार कमजोर हो रही बैलेंस शीटवाली कंपनी की इस स्थिति को बहुत पहले भांप नहीं सकी।
इन सब के बावजूद आम आदमी के मन में यह कुतूहल है कि क्या हमारा पैसा सुरक्षित है। ५ लाख का जमा पर बीमा के बावजूद यह बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। वह भी ऐसे दौर में जब पीएमसी बैंक का एक केस सामने आ चुका है। इस संबंध में यही कहना है कि इसमें चिंता की लकीरें तो आएंगी लेकिन पेनिक होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह बैंक गोइंग कंसर्न है और सरकार गोइंग कंसर्न को बंद कर मार्वेâट में नकारात्मकता पैâले इसके पक्ष में नहीं है। इसलिए सरकार ने ताबड़तोड़ कई कदम उठाए हैं, इसमें ५००,०० तह निकासी की सुविधा, विशेष परिस्थितियों में ५ लाख तक निकासी की सुविधा, किसी भी बैंक के एटीएम से निकासी की सुविधा, तरलता स्थापित करने हेतु रिजर्व बैंक द्वारा अतिरिक्त फंड प्रदान करना एवं इस बैंक के उद्धार हेतु स्टेट बैंक के द्वारा उद्धार प्लान देना, जिसके तहत वह ४९ फीसदी शेयर उसके पास आएंगे, वह पैसा डालेगा और इस बैंक का प्रबंधन स्टेट बैंक के पास आएगा और तत्काल में कॉर्पोरेट गवर्नेंस में कोई लीक न हो उसके लिए प्रशासक को नियुक्त करना। ये सब बचाव और रक्षात्मक कदम लिए गए हैं जो इस बैंक को बचाने के लिए है, इस सब स्टेप को देखकर यही लगता है कि इस बैंक के मर्जर की जगह सरकार और रिजर्व बैंक की इच्छा है कि यह बैंक यस बैंक के नाम से ही चले।
यस बैंक के अलावा जो दूसरी चीज हिंदुस्थान के बाजार को प्रभावित की वह था कोरोना वायरस का विश्वव्यापी प्रसार। चीन से पैâला यह वायरस विश्व के कई देशों को हैरान और परेशान कर रहा है और जब तक इसकी दवा विकसित नहीं हो जाती हर देश अपने आपको बचाव की मुद्रा में सिकोड़ते हुए चल रहा है और इस सिकोड़ने का परिणाम यह हुआ है की वैश्विक स्तर पर आर्थिक गतिविधियां सिकुड़ गई हैं, माल की सप्लाई चेन रुक गई, हिंदुस्थान जो की माल के सप्लाई चेन में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से अच्छी तरह से जुड़ा था। वह इस सप्लाई चेन में आई रुकावट से प्रभावित हो गया। इससे सिर्फ माल का सप्लाई चेन ही नहीं रुका, लोगों का आवागमन रुक गया, कई देश ट्रेवल एडवाइजरी जारी कर रहे हैं तो कई देश वीजा निरस्त कर रहे हैं, लोगों के वैश्विक आवागमन के रोक ने व्यावसायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को बुरी तरह से प्रभावित किया, जिस कारण से व्यावसायिक सौदे बुरी तरह से प्रभावित हुए। एक तरफ तो माल का सप्लाई चेन और दूसरी तरफ लोगों का आवागमन रुक जाने से सौदों पर दोहरी मार पड़ी, जिसके कारण चौथे क्वार्टर का परिणाम खराब आने की पूरी उम्मीद है और इसी खराब सेंटिमेंट के कारण दुनिया के शेयर बाजार हिंदुस्थान समेत लगातार निराशाजनक प्रदर्शन करने लगे।
हो सकता है कि कोरोना वायरस का यह नया दौर एक नया वर्क कल्चर लेकर आए, लोगों का वर्क प्रâॉम होम बढ़ जाए, मीटिंग ज्यादा से ज्यादा वीडियो कांप्रâेंस से होने लगे, भले ही बलात लेकिन लोग अब इस कल्चर से रू-बरू होने लगे हैं और यदि कंपनियों को इसके अच्छे परिणाम आए तो कोरोना वायरस के बाद एकदम से नया वर्क कल्चर और नया व्यापारिक वातावरण देखने को मिलेगा, हो सकता है लोग चीन से अपनी निर्भरता कम करने की सोचें यह चीजें चुनौतियों से उपजी एक आशा है।
कोरोना वायरस से जुड़ी एक और घटना सऊदी अरब द्वारा क्रूड आयल का मूल्य कई सालों के बाद अचानक से घटा देना ताकि मांग बनी रहे इस माहौल में और इसमें ओपेक देशों में सहमती न बन पाना विश्व के शेयर बाजार के लिए एक संवेदनशील घटना हो गई और विश्वव्यापी शेयर के मार्वेâट गिरने लगे। हालांकि हिंदुस्थान में तो क्रूड आयल घटने से फायदा ही होता था लेकिन चूंकि पूरे दुनिया के बाजार गिर रहे थे तो हिंदुस्थान का बाजार भी इससे अछूता नहीं रह पाया।
कुल मिलाकर यह इकोनॉमी का इकोनमी क्लास चल रहा है, हम मंजिल तक पहुंचेंगे तो लेकिन इकोनॉमी का इकोनमी क्लास थोड़ा कष्ट जरूर देगा हो सकता है। कई कष्टप्रद स्थितियों का सामना करना पड़े, नींद गायब होती रहे लेकिन हमें देश के पायलट और जहाज दोनों पर भरोसा कायम रखना पड़ेगा और इसके अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है क्योंकि निराशा का अगला दौर बाजार के और गोते लगवा सकता है। कोरोना वायरस पर हिंदुस्थान या विश्व जल्द ही विजय पा लेंगे तब इकोनॉमी और बाजार दोनों को सुधरने और बाजार में चीन मुक्त निर्भरता के इकोनॉमिक मॉडल का विकास देख सकते हैं।