यात्रा संभाल के! लाइफ छीन सकती है लाइफ लाइन

मुंबई की लाइफ लाइन कहलानेवाली लोकल ट्रेनों में सफर के दौरान अब अतिरिक्त सावधानी बरतना अनिवार्य हो गया है। भीड़, लापरवाही या जल्दबाजी जैसी वजहें पग-पग पर खतरे में डाल सकती हैं।
वर्ष २०१८ में मुंबई की उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान ६,३३० यात्री रेल हादसों का शिकार हुए हैं, जिनमें २,९८१ यात्रियों की मौत हो गई। मरनेवालों में २,६१८ पुरुष तथा ३६३ महिलाएं शामिल थीं। अर्थात गत वर्ष उपनगरीय ट्रेनों में सफर के दौरान औसतन १७ यात्री प्रति दिन खतरों यानी हादसों के शिकार हुए। हादसों के मामले में कल्याण, कुर्ला, ठाणे, बोरिवली, वसई, मुंबई सेंट्रल और मुंबई सीएसएमटी अव्वल सिद्ध हुए हैं इसलिए लाइफ लाइन में संभल कर यात्रा करें।
रेलवे यात्रा के दौरान हादसे और इन हादसों में लोगों के मरने की खबरें अब आम हो चुकी हैं लेकिन मुंबई की ‘लाइफलाइन’ कही जानेवाली लोकल ट्रेनों में सफर के दौरान हजारों यात्री हर साल अपनी जान गंवाते हैं, यह चिंता का सबब है। रेलवे पटरी पर पदयात्रा यानी पार करने का प्रयास करना, चलती ट्रेन के बाहर लटकना, चढ़ने-उतरने का प्रयास करना हादसों की प्रमुख वजह रही है। रेल प्रशासन इन हादसों पर रोक लगाने में नाकाम सिद्ध हो रहा है। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को आरटीआई के तहत दी गई जानकारी के अनुसार सर्वाधिक १,६१९ यात्री रेल पटरी पार करते समय शिकार बनें, जिनमें १,४२२ पुरुष तथा १९७ महिलाएं शामिल थीं। इसी तरह चलती ट्रेन में चढ़ने-उतरने या लटकने के दौरान गिरने से ७३० यात्रियों की मौत हुई थी, जिनमें ६५४ पुरुष तथा ७६ महिलाएं शामिल हैं। १९ पुरुषों की मौत चलती ट्रेन में लटकने के दौरान पोल से टकराने से हुई है। मुंबई में गत वर्ष ५ महिलाओं सहित ३५ यात्रियों ने ट्रेन के आगे कूद कर खुदकशी की थी। गौरतलब हो कि इस दौरान पटरी पार करते समय ३२३ तथा चलती ट्रेन में चढ़ते-उतरते या लटकते समय गिरने से १,५८४ यात्री घायल भी हुए हैं। बात रेलवे पुलिस थानों की करें तो गत वर्ष कल्याण रेलवे पुलिस थाने में सर्वाधिक ३९० यात्रियों की मौत दर्ज हुई थी। इसके बाद कुर्ला-३४४, ठाणे- ३१७, बोरिवली-२८४, वसई-२४६ तथा मुंबई सेंट्रल में १४० यात्रियों की मौत दर्ज हुई थी।
 रोज १७ यात्रियों पर मंडराता है
हादसों का खतरा
 लापरवाही से जाती हैं जानें
 कल्याण में सबसे ज्यादा मौत