यादों के झरोखों से : किशोर कुमार की गुलाटियां

६० के दशक में निर्माता डब्ल्यू.वी. रामन की फिल्म ‘रंगोली’ के सेट पर एक ऐसी घटना घटी, जिसे लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं। शूटिंग के दौरान सेट पर किशोर कुमार ने ऐसी हरकत की, जिसे शायद ही संसार के किसी अभिनेता ने की होगी। अपने पारिश्रमिक को लेकर किशोर कुमार के कठोर नियम चर्चित थे। रिकॉर्डिंग पर गीत गाने से पूर्व किशोर कुमार अपने आदमी अब्दुल से इशारों में पूछते थे कि गाने का पारिश्रमिक मिल गया है? अब्दुल जब संकेत देता की पारिश्रमिक मिल गया है तो किशोर तुरंत गीत की रिकॉर्डिंग में जुट जाते। अगर अब्दुल का संकेत नकारात्मक होता तो उसी पल किशोर कुमार का गला खराब हो जाता और अंतत: रिकॉर्डिंग वैंâसिल हो जाती।
फिल्म ‘रंगोली’ की यह घटना भी पारिश्रमिक को लेकर घटी थी। फिल्म में किशोर कुमार हीरो का किरदार निभा रहे थे। निर्माता रामन ने किशोर से वादा किया था कि स्टूडियो पहुंचते ही उन्हें उनका पारिश्रमिक दे दिया जाएगा। किशोर कुमार ने घर से निकलते ही निर्माता रामन को फोन पर सूचना दे दी थी कि वो उनका पैसा तैयार रखें। किशोर कुमार ने अब्दुल को स्टूडियो में दाखिल होते ही कहा कि वह कार को सेट के पास ही खड़ी रखे। अब्दुल ने ऐसा ही किया और कार को ‘रंगोली’ के सेट के ठीक बाहर ही खड़ा कर दिया। किशोर दा कार से निकले और निर्माता रामन से रुपए मांगे। निर्माता ने किशोर दा से कहा- ‘दादा आप मेकअप तो कीजिए। मेरा आदमी बैंक से आपके पांच हजार रुपए लेकर आ ही रहा होगा। जब तक आप मेकअप करेंगे मेरा आदमी पहुंच जाएगा।’ निर्माता रामन के इस प्रकार विश्वास दिलाने पर किशोर दा ने मेकअप रूम में जाकर मेकअप करना प्रारंभ कर दिया। अगले एक घंटे में मेकअप भी पूरा हो गया और फिल्म के लेखक-निर्देशक राजेंद्र सिंह बेदी ने आकर किशोर कुमार को उनके संवाद याद करा दिए और फिल्म का शॉट देने के लिए सेट पर चलने को कहा। किशोर कुमार ने फिर निर्माता रामन से पूछा, ‘पैसे कहां हैं? और तुम्हारा आदमी?’ उत्तर में निर्माता रामन ने कहा- ‘दादा, मेरा आदमी बस बैंक से निकलने ही वाला है। क्या है कि नोट दस-दस का है इसलिए गिनती करने में उसको समय लग रहा है। आप मुझ पर भरोसा करो। सेट पर चलो तब तक आदमी आ जाएगा।’
निर्माता की निवेदनवाली मुद्रा देखकर किशोर कुमार किसी तरह सेट पर भी पहुंच गए और निर्देशक बेदी ने रिहर्सल शुरू कर दी। किशोर कुमार एक ओर सीन की रिहर्सल कर रहे थे और दूसरी ओर बार-बार सेट के गेट की ओर भी देख रहे थे कि आदमी कब पैसे लेकर आता है। निर्देशक बेदी ने हीरो यानी किशोर कुमार को फाइनल रिहर्सल भी करा दी और टेक करने का आदेश दिया। किशोर कुमार ने फिर निर्माता रामन की ओर पैसे के लिए इशारा किया तो रामन दौड़कर किशोर दा के पास आया और हाथ जोड़कर बोला- ‘दादा, मेरा आदमी बैंक से पैसा लेकर निकल गया है। कभी भी आ जाएगा। आप प्लीज शॉट दे दीजिए।’
किशोर कुमार के धैर्य और विश्वास की सीमा टूट चुकी थी और उन्हें दाल में अब कुछ काला नजर आने लगा था। उधर निर्देशक राजेंद्र सिंह बेदी ने भी शॉट फिल्माने के लिए आदेश दे दिया था। लाइट्स ऑन हो चुकी थी और कैमरा चल पड़ा था। किशोर कुमार करें तो क्या करें? अंतत: किशोर कुमार ने कैमरे के सामने संवाद बोलना आरंभ कर दिया- ‘तुम मेरे भैया हो… मेरे पांच हजार रुपैया हो… तुम मेरी नैया हो… पांच हजार रुपैया हो… रुपैया दे… रुपैया दे…!’ किशोर कुमार के मुंह से ये डायलॉग सुन निर्देशक बेदी ने तुरंत वैâमरा रुकवा दिया। निर्देशक ने निर्माता की ओर देखा और पूछा, ‘ये क्या हो रहा है?’ एक बार फिर हाथ जोड़कर रामन हीरो के सामने खड़े थे और निर्देशक बेदी भी बार-बार उनसे आग्रह कर रहे थे कि कम-से-कम शूटिंग का पहला शॉट तो दे दें। आखिरकार, किसी तरह किशोर कुमार शॉट के लिए राजी हो गए। निर्देशक के ‘एक्शन’ कहते ही किशोर कुमार ने कैमरे के सामने जमीन पर बंदरछाप गुलाटी मारी और चिल्लाकर बोले, ‘मेरा पांच हजार रुपैया दे दे भैया…’ कहते हुए वे सेट के गेट की तरफ भागे। जब तक निर्माता रामन गेट पर पहुंचते किशोर कुमार अपनी कार में बैठकर उड़न छू हो गए!