युद्ध के मोर्चे पर पाकिस्तान तैयार, घायल सैनिकों के लिए अस्पतालों में बेड रिजर्व रखने को कहा

पुलवामा हमले के बाद हिंदुस्थान की संभावित जवाबी कार्रवाई से डरे पाकिस्तान ने युद्ध के मोर्चों पर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। यह सब ऐसे दौर में हो रहा है जब आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर ने इमरान खान की सरकार से हिंदुस्थान के किसी दबाव में न झुकने को कहा है, वहीं दूसरी ओर मिलिट्री अस्पताल में आकस्मिक स्थिति के लिए बेड की संख्या में इजाफे के साथ ही सिविल अस्पतालों को घायल जवानों के लिए २५ फीसदी बेड रिजर्व रखने को कहा गया है।
सूत्रों के अनुसार दो आधिकारिक दस्तावेजों से इस बात की जानकारी मिली है कि पाकिस्तान अलग-अलग मोर्चों पर युद्ध की तैयारी में जुट गया है। इनमें से एक दस्तावेज बलूचिस्तान स्थित मिलिटरी बेस का है, जबकि पाकिस्तानी कब्जेवाले कश्मीर (पीओके) में स्थानीय प्रशासन को एक नोटिस भेजा गया है। इस नोटिस से पता चलता है कि पड़ोसी मुल्क ने हिंदुस्थान के साथ जंग की तैयारी शुरू कर दी है। क्वेटा वैंâटोन्मेंट स्थित पाकिस्तानी सेना के बेस हेडक्वॉर्टर्स क्वेटा लॉजिलस्टिक्स एरिया की तरफ से २० फरवरी को जिलानी अस्पताल को एक खत भेजा गया है, जिसमें हिंदुस्थान से संभावित युद्ध की सूरत में चिकित्सकीय मदद के लिए इंतजाम करने को कहा गया है। एचक्यूएलए के फोर्स कमांडर एशिया नाज की ओर से जिलानी अस्पताल के अब्दुल मलिक को खत में लिखा गया है कि पूर्वी प्रâंट पर इमर्जेंसी वॉर की स्थिति में क्वेटा लॉजिस्टिक्स एरिया में सिंध और पंजाब के सिविल या मिलिटरी अस्पतालों से जख्मी जवान लाए जा सकते हैं। प्राथमिक उपचार के बाद इन जवानों को मिलिटरी और सिविल पब्लिक सेक्टर से बेड की उपलब्धता (सिविल मिलिटरी हॉस्पिटल में) होने तक बलूचिस्तान के सिविल अस्पताल शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। इसमें यह भी कहा गया है कि लॉजिस्टिक्स एरिया में विस्तृत मेडिकल सपोर्ट प्लान बनाया गया है जिसमें राज्य के सभी मिलिटरी और सिविल अस्पताल शामिल हैं। मिलिट्री अस्पताल में आकस्मिक स्थिति के लिए बेड की संख्या में इजाफे के साथ ही सिविल अस्पतालों को घायल जवानों के लिए २५ फीसदी बेड रिजर्व रखने को कहा गया है। यही नहीं निजी अस्पतालों को भी २५ प्रतिशत बेड आरक्षित रखने के साथ-साथ जरूरी सुविधाओं को चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। खत के अंत में लिखा गया है कि हमें पाकिस्तान के हर हिस्से से जबरदस्त समर्थन मिला है और उम्मीद करते हैं कि बलूचिस्तान में भी ऐसी ही प्रतिक्रिया मिलेगी।