युद्ध तो होगा!, कहीं तीसरे महायुद्ध की चपेट में न आ जाए दुनिया?

ईरान पर हमला करने के लिए हवा में उड़े अमेरिकी लड़ाकू जेट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद भले ही वापस लौट आए हों पर युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के जानकारों का मानना है कि युद्ध तो होगा। भले ही अभी नहीं हो पर कुछ समय बाद होगा ही। ट्रंप चुप नहीं बैठनेवाले। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है। ईरान ने भी कह दिया है कि वह अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। खतरनाक ईरानी रिवोल्युशनरी गार्ड के १ लाख सैनिक खाड़ी की गतिविधियों पर बारीक नजरें रखे हुए हैं। ऐसे में यह आशंका सता रही है कि अगर युद्ध हुआ तो कहीं दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की चपेट में न आ जाए।

अमेरिका ने पिछले महीने ही खाड़ी में अपना मेन एयरक्राफ्ट वैâरियर अब्राहम लिंकन और बॉम्बर टास्क फोर्स को तैनात कर दिया है। इस बीच इस युद्ध की आशंका में कल मुंबई शेयर बाजार भी धड़ाम से ४०७ अंक गिर गया। भारतीय नौसेना ने भी युद्ध की आशंका को देखते हुए खाड़ी के अपने प्रभुत्व वाले क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से अपने २ युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। यूं तो ईरान-अमेरिका के बीच टशन काफी पुराना है पर युद्ध की नौबत पिछले महीने तब बनी जब ईरान पर ६ देशों को तेल निर्यात की बढ़ाई गई समय सीमा समाप्त हो गई। इन ६ देशों में हिंदुस्थान भी शामिल है। इसके बाद ईरान ने भी घोषणा कर दी कि उसके जल क्षेत्र में अगर कोई बाहरी पोत घुसा तो वह उसे मार गिराएगा। पिछले एक महीने में ईरान की खाड़ी से गुजरनेवाले २ तेल के टैंकरों पर हमले हो चुके हैं। अमेरिका का कहना है कि ये ईरान ने किया जबकि ईरान ने इनकार किया है। ताजा तनाव तब भड़का जब ३ दिन पहले एक अमेरिकी ड्रोन को ईरान ने मार गिराया। इसके बाद अमेरिकी सेना ईरान पर हमले के मोड में आ गई।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी तनाव के बीच परसों आधुनिक अमेरिकी एफ-३५ लड़ाकू विमान ईरान पर हमला करने के लिए उड़ भी चुके थे। उनके निशाने पर ईरान के रडार और बैटरी थे। लेकिन हवा में पहुंचते ही विमान को वापस लौटने का संदेश मिला और फिलहाल युद्ध टल गया।
ईरान से तनाव के मद्देनजर अमेरिका ने पिछले महीने ही अरब की खाड़ी में अपना विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन और बॉम्बर टास्क फोर्स को भी तैनात कर दिया गया था। लिंकन पर एफ ३५ व स्टेल्थ श्रेणी समेत कुल मिलाकर ९० हेलीकॉप्टर व फाइटर प्लेन मौजूद रहते हैं।
खबरों के अनुसार ईरान की ओर से जब गुरुवार को अमेरिकी ड्रोन मार गिराने की जानकारी दी गई, उसी समय अमेरिकी राष्‍ट्रपति ट्रंप ने हमले के ऑर्डर पर साइन कर दिया था। ‘न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स’ में कई सीनियर ऑफिसर्स के हवाले से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि बाद में ट्रंप ने शाम ७ बजे अपना यह आदेश वापस ले लिया। माना जा रहा है कि ट्रंप के ऊपर हमला न करने का अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों का भारी दबाव पड़ा।
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार शाम ७ बजे तक अमेरिकी सेना और राजनयिक अधिकारी उम्मीद कर रहे थे कि जवाबी कार्रवाई होगी। अखबार ने एक सीनियर अधिकारी के हवाले से लिखा, ‘विमान तैयार थे और युद्धपोत भी मोर्चे पर थे, लेकिन कोई मिसाइल नहीं दागी गई क्योंकि बाद में आदेश कुछ और आया।’ अखबार का कहना है कि सैन्य कार्रवाई शुक्रवार सुबह होनी थी ताकि ईरानी सेना या आम लोगों को कम नुकसान उठाना पड़े। हालांकि अभी तक इस मामले में व्हाइट हाउस और पेंटागन ने इन रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

पेंटागन का पैंतरा
ईरान की तरफ से बढ़ते खतरों का हवाला देते हुए अमेरिका ने पिछले कुछ हफ्तों में इस क्षेत्र में भारी मात्रा में सैनिक तैनात कर दिए हैं। इसके अलावा पेंटागन ने पैंतरा बदलते हुए सेंट्रल एशिया में १,००० और सैनिकों को तैनात करने की घोषणा की है।

बढ़ेगा ‘टैंकर वॉर’
क्या ओमान की खाड़ी टैंकर वॉर की ओर बढ़ रही है? पिछले हफ्ते २ ऑयल टैंकरों पर हमले हो चुके हैं पर ये हमले किसने किए यह पता नहीं चल रहा है। अमेरिका, ईरान पर आरोप लगाता है पर ईरान इनकार करता है। बीबीसी के पॉल एडम्स कहते हैं, ‘क्या हम किसी नए तरह के ‘टैंकर वॉर’ की ओर बढ़ रहे हैं।’ ऐसी स्थिति रही तो कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। उधर ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद कई विमान कंपनियों को अपने रूट बदलने पड़े हैं। भारतीय नौसेना ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए २ युद्धपोत इस क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं।

ट्रंप पर था हमले का दबाव
व्हाइट हाउस में जब ईरान मसले पर महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी तो सभी का मत था कि ईरान पर हमला होना चाहिए। ट्रंप पर हमले का भारी दबाव बनाया गया। ट्रंप ने मिलिट्री लीडर्स से संभावित हमले के बारे में चर्चा भी की। अमेरिकी अधिकारी हमले में कम से कम नुकसान चाहते थे। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पिओ और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान के खिलाफ कठोर नीतियों की वकालत की। हालांकि व्हाइट हाउस खुफिया समिति के अध्यक्ष ऐडम शिफ ने कहा, ‘राष्ट्रपति निश्चित रूप से बात सुन रहे थे, जब बैठक में कांग्रेस के नेताओं ने उनसे सतर्क रहने और पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और ना बढ़ाने का आग्रह किया।’