" /> युवाओं को दीवाना बना रही है उद्धव ठाकरे की शैली

युवाओं को दीवाना बना रही है उद्धव ठाकरे की शैली

कोरोना संकट के दौर में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की गर्मजोश कार्यशैली, साहसिक पैâसले, जबर्दस्त आत्मविश्वास और संवाद के बेबाक अंदाज ने महाराष्ट्र की जनता का आत्मविश्वास खूब बढ़ाया है। श्री ठाकरे की बेबाक शैली से युवा वर्ग बेहद प्रभावित हुआ है।
उल्लेखनीय है कि भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पहली बार संवैधानिक पद ग्रहण करने वाले उद्धव ठाकरे ने अपनी इमानदार कोशिशों और कुशल नेतृत्व क्षमता से अपने सारे विरोधियों को चुप करा रखा है। अपने पिता हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे के रोखठोक अंदाज को कायम रखते हुए वे जांबाज सेनापति की भांति कोरोना से युद्ध भी लड़ रहे हैं और विरोधी दलों की हरकतों का मुहतोड़ जवाब भी देते जा रहे हैं। उनके इस पराक्रम ने महाराष्ट्रवासियों का आत्मविश्वास लौटाया है।
रविवार की शाम राज्य की जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने लाखों विद्यार्थियों के हक में जो पैâसला सुनाया उससे विद्यार्थियों की बांछें खिल गई और खुशी का ठिकाना ना रहा। श्री ठाकरे ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर ढाई महीने से चल रही सारी शंकाओं-आशंकाओं का भी एक झटके में ही समाधान कर दिया। उन्होंने ऐलान किया कि सरकार अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को उनके पिछले सेमिस्टर में मिले अंकों के औसत के आधार पर मार्क्स देकर सभी को पास करना चाहती है। ताकि वे अगले सत्र की पढ़ाई शुरू कर सकें। अब उन्हें परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। श्री ठाकरे विद्यार्थियों के पक्ष में इतना ठोस पैâसला लेने वाले संभवत: पहले मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि कोरोना संकट और लॉकडाउन के इस दौर में विद्यार्थी और अभिभावक आखिर कब तक इंतजार करेंगे? इसलिए जो परीक्षाएं रुकी हुई हैं, खासतौर पर अंतिम वर्षों की, उन सभी को पास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो विद्यार्थी यह सोचते हैं कि यदि परीक्षा होती तो वे अधिक मार्क्स पा लेते, ऐसी विद्यार्थियों को आगे परीक्षा देकर कोशिश करने अवसर भी दिया जाएगा। इस घोषणा से बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित शिक्षा विभाग में और अभिभावकों में भी खुशी की लहर दौड़ गई है। साथ ही विद्यार्थियों ने अपने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों के बारे में सोचते वक्त वह स्वयं को अभिभावक के तौर पर देखते हैं। उनके मन में भी यही चिंता होती है कि आखिर बच्चों के भविष्य क्या होगा? अगले साल की पढ़ाई का क्या होगा? स्कूल – कॉलेज कब खुलेंगे? इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल स्कूल-कॉलेज शुरू हों या ना हों, पढ़ाई शुरू हो जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने ई-शिक्षा, वीडियो कॉन्प्रâेंसिंग, टीवी-रेडियो आदि माध्यमों का सहारा लेने की बात कही। उनकी यह बात अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को खूब पसंद आयी है। बच्चों को श्री ठाकरे मुख्यमंत्री की बजाए एक अच्छे शिक्षक और अभिभावक की भूमिका में नजर आए। मालाड-पूर्व स्थति एक एकेडमी के प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह पैâसला सराहनीय और अभूतपूर्व कदम है। साथ ही ई-शिक्षा आरंभ करने का उनका अगला कदम भी ऐतिहासिक है और इसके क्रांतिकारी परिणाम होंगे। विद्यार्थी अब घर से ही पढ़ाई कर पाएंगे। यह शुरू भी है। बच्चों के फीडबैक भी ऑनलाइन आने लगे हैं। अब तो स्कूली शिक्षक टाइम-टेबल के अनुसार योग-साधना और कसरत भी बच्चों करा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पढ़ाई का पूरा रास्ता साफ कर दिया है। ई-लर्निंग से लॉकडाउन भी चलता रहेगा, सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहेगी और पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। शैक्षणिक वर्ष का नुकसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षा जगत में उत्साह का संचार कर दिया है।
प्लान ‘एमबीए’
अपने लाइव संदेश में मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र की जनता के लिए ‘एमबीए’ अर्थात् ‘मिशन बिगिन अगेन’ प्लान का मंत्र देकर उत्साह जगाने का काम किया। उन्होंने राज्य में ३० जून तक बढ़ाए गए लॉकडाउन का नाम ‘मिशन बिगिन अगेन’ दिया है। इसको लेकर उन्होंने उद्योग-धंधों, दुकानों, कार्यालयों व सामान्य कामकाज को चरणबद्ध तरीके शुरू करने की तैयारी दर्शायी है। उनका कहना है कि अन्य देशों व कई राज्यों में कुछ उपक्रम आरंभ करके फिर बंद करना पड़ा। हमें ऐसा नहीं होने देना है। जो काम एक बार शुरु हो उसे बंद करने की नौबत ही न आए, ऐसी शुरुआत करनी है। पहले ग्रीन जोन में यह प्रयोग होगा। फिर परिणाम देखकर आगे बढ़ेंगे। मुंबई के युवा एवं समाजसेवियों का कहना है कि मुख्यमंत्री का स्वभाव है कि एक बार जो कदम बढ़ाया उसे पीछे नहीं लेना है। इसलिए ठोक बजाकर कदम आगे बढ़ाने का उनका प्रयत्न महाराष्ट्र को आगे ले जाने वाली पहल है। समाज सेवियों का ये भी कहना है कि उद्धव ठाकरे ही नहीं पूरी शिवसेना और समूचा महाराष्ट्र इसी स्वाभिमान के साथ विकास की राह पर चलने का पक्षधर है। यही तेवर युवाओं को पसंद आ रहा है। बता दें कि उद्धव ठाकरे ने कहा है कि लॉकडाउन खोलना है। जरूर खोला जाएगा लेकिन धीरे-धीरे खोला जाएगा। उन्होंने अपना इरादा व्यक्त करते हुए कहा कि जो कुछ खोला जाएगा वह खोल ही दिया जाएगा। फिर उसे बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने पिछली गलतियों और देश-दुनिया के अन्य इलाकों में लॉकडाउन एक बार खोलकर फिर लागू किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि हम धीरे-धीरे अध्ययन करके की लॉकडाउन खोलेंगे और जो खोल दिया जाएगा, वह खोल ही दिया जाएगा।
मरीजों का आकड़ा गलत
कोरोना मरीजों के आकड़ों की डरावनी तस्वीर से पहली बार खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पर्दा हटाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या जो ६५००० से ऊपर बताई जा रही है, वह वस्तुत: उतनी नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य में पहला मरीज पाए जाने से लेकर अब तक पाए गए सारे मरीजों की यह कुल संख्या है। जबकि पहला मरीज और उसके बाद के कई मरीज अब तक ठीक हो कर घर चले गए हैं। ठीक हुए मरीजों की संख्या उन्होंने २८,००० से ऊपर बताई और कहा कि केवल ३४,००० एक्टिव मरीज ही हैं। उनमें भी २९,००० खतरे से बाहर हैं। उनमें कोई सिम्प्टम्स नहीं है। जबकि दो से ढाई हजार लोगों में आंशिक सिम्प्टम्स हैं और केवल २०० लोग ही वेंटिलेटर पर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वेंटिलेटर पर गए हुए मरीज भी ठीक होकर लौटे हैं। मुख्यमंत्री की इस बात को सुनकर लोगों के मन में बढ़ती कुंठा और भय पर रोक लगी है। सबको राहत की सांस मिली है। मुंबईकरों का कहना है कि कोविड-१९ से महाराष्ट्र सर्वाधिक प्रभावित है। क्योंकि महाराष्ट्र और विशेषकर मुंबई में दुनियाभर के लोगों का आना-जाना होता है। यह देश की आर्थिक राजधानी है। लॉकडाउन से पहले अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और ट्रेनों-बसों में यहां खूब आवागमन हुआ। यहां घनी आबादी भी है। देश में कुल श्रमिकों का एक तिहाई अकेले महाराष्ट्र में है। इसलिए दुर्भाग्य से यहां संक्रमण भी सर्वाधिक हुआ है लेकिन मृत्यु दर बहुत कम है। इलाज मिल रहा है और मरीजों को स्वास्थ्य लाभ भी हो रहा है। पहली बार सत्ता संभाल रहे उद्धव ठाकरे का काम इतना बेहतरीन है कि उनकी सर्वत्र सराहना हो रही है। मुंबई और महाराष्ट्र के लोग उनसे संतुष्ट हैं और उन पर पूरा भरोसा कर रहे हैं। वे वाकई एक काबिल मुख्यमंत्री साबित हो रहे हैं। महाराष्ट्र को ऐसे मुख्यमंत्री पर अभिमान है।
महाराष्ट्र का अपमान मत करो
उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री राहत कोष में प्राप्त राशि और उसमें से कोरोना संकट के राहत के तौर पर किए खर्च का हिसाब देकर स्थिति स्पष्ट कर दी। अब युवा वर्ग पूछ रहा है कि प्रधानमंत्री और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री ऐसा क्यों नहीं करते? सब्जी-फलों के एक व्यापारी ने कहा कि महाराष्ट्र का पूर्व मुख्यमंत्री महाराष्ट्र की बजाए प्रधानमंत्री कोष में अनुदान देने की बात कह कर अपने ही राज्य का अपमान करता है। उसे सोचना चाहिए कि देश के कुल कोरोना संक्रमण का एक तिहाई अकेले महाराष्ट्र में है तो वह केंद्र से कहता क्यों नहीं कि देश की कुल राहत राशि का एक तिहाई महाराष्ट्रवासी कोरोना पीड़ितों के बचाव पर खर्च करे।
हाथ थाम कर चलो….
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में प्रासंगिक उदाहरण देकर अपनी दूरगामी व सकारात्मक सोच का अच्छा परिचय दिया। उन्होंने कहा कि बारिश का मौसम आ रहा है और जगह-जगह खुले में काई पैâली होगी। हमारे कदम उस पर न फिसलें, यह ध्यान रखना होगा। उससे बचने के लिए जिस तरह हम बाहर कदम बढ़ाते ही एक दूसरे का हाथ थाम लेते हैं। एक दूसरे को गिरने से बचाते हैं। लॉकडाउन धीरे-धीरे खुलने पर ठीक उसी तरह सभी को सरकार का हाथ थाम कर अपना कदम आगे बढ़ाना होगा। उनका आशय था कि सरकार जो दिशा-निर्देश देगी, जनता को उसका पालन करना होगा। ताकि कोरोना के खिलाफ हमारी लड़ाई कमजोर न पड़े। उन्होंने कहा कि परस्पर हाथ थाम कर हम एक दूसरे को गिरने नहीं देंगे। इसके साथ ही श्री ठाकरे ने विरोधी दलों पर ताना कसते हुए कहा कि सरकार के पक्षों ने भी एक दूसरे का हाथ मजबूती से थामे रखा है। सरकार गिरनेवाली नहीं है। इसलिए विरोधी दल अपना परिश्रम व्यर्थ करने की बजाए महाराष्ट्र की जनता के हितों में लगाएं।