यूपी का झटका कांग्रेस को फटका!

मुंबई की ६ और ठाणे जिले के ४ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आगामी २९ अप्रैल को मतदान होनेवाला है। इन सभी १० निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का आंकड़ा देखा जाए तो उत्तर भारतीय मतदाता यहां निर्णायक भूमिका निभानेवाले हैं। मुंबई-ठाणे जिले में पिछले २०१४ के लोकसभा चुनाव से जिस तरह उत्तर भारतीय मतदाताओं का रुझान शिवसेना-भाजपा महायुति की ओर हुआ है, उससे तो यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि २०१९ के इस चुनाव में भी यूपी के मतदाता घोटालेबाज पार्टियों को जोर का झटका देनेवाले हैं। दूसरे शब्दों में कांग्रेस-राकांपा को जोरदार फटका लगना तय है। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई-ठाणे के निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस-राकांपा का खाता खुलना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इस बात को कांग्रेसी भी मान रहे हैं कि मुंबई व ठाणे में कांग्रेस-राकांपा का खाता नहीं खुलेगा। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री के मुताबिक कांग्रेस की ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि’ वाली स्थिति हो गई है। कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती है कि मुंबई-ठाणे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस का वोट बैंक रहा उत्तर भारतीय समाज शिवसेना-भाजपा के साथ चला गया है। इसके बावजूद उत्तर भारतीय मतदाता जिससे सबसे अधिक नफरत करते हैं, उस पार्टी से कांग्रेस-राकांपा प्रचार करवा रही है। इससे जो उत्तर भारतीय मतदाता कांग्रेस-राकांपा से जुड़ना चाहते थे, वे भी शिवसेना-भाजपा के साथ जुड़ गए हैं क्योंकि उन्हें महसूस हो गया है कि शिवसेना-भाजपा के साथ रहने में ही इज्जत, मान-सम्मान व संरक्षण है।
आगामी २९ अप्रैल को मुंबई-ठाणे में मतदाता लोकसभा के लिए अपने प्रत्याशी चुनने के लिए मतदान करेंगे। मगर इस बार मतदाताओं का जो मूड दिख रहा है, उसमें स्पष्ट है कि उनकी पसंद महायुति है। इस संदर्भ में उत्तर भारतीय मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। हर सीट पर उनका वर्चस्व है और वे यहां हार-जीत में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। जो हालात हैं उसमें मुंबई-ठाणे में आघाड़ी का खाता खुलना भीr मुश्किल लग रहा है।

जनवरी, २०१९ को चुनाव आयोग की ओर से जारी मतदाता सूची में मुंबई की छह सीटों पर कुल ९४ लाख ५८ हजार ३७९ मतदाताओं के नाम दर्ज हैं, जिसमें तकरीबन १७ लाख मतदाता उत्तर भारतीय हैं। उत्तर मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ६.५० लाख मराठी, ५.५० लाख गुजराती, जैन व राजस्थानी, २.५० लाख उत्तर भारतीय, १.१५ लाख मुस्लिम, १ लाख दक्षिण भारतीय मतदाता हैं। उत्तर-पश्चिम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ६ लाख मराठी, ४.५० लाख उत्तर भारतीय, ३.५० लाख मुस्लिम, २ लाख गुजराती, जैन व राजस्थानी, १.२५ लाख दक्षिण भारतीय मतदाता हैं।

उत्तर-पूर्व लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ६ लाख मराठी, २.५० लाख गुजराती, २.५० लाख उत्तर भारतीय, २ लाख मुस्लिम और २.३० लाख अन्य मतदाता हैं। इसी तरह उत्तर-मध्य मुंबई निर्वाचन क्षेत्र में ५.५९ लाख मराठी, ४.१४ लाख मुस्लिम, १.८० लाख गुजराती व राजस्थानी, २.७३ लाख उत्तर भारतीय, १.०६ लाख दक्षिण भारतीय, ७६ हजार क्रिश्चियन व ३४ हजार अन्य मतदाता हैं।

दक्षिण-मध्य मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में मराठी ५ लाख, उत्तर भारतीय १.५० लाख, मुस्लिम १.१५ लाख, दक्षिण भाषी ८० हजार तथा अन्य १ लाख मतदाता हैं। दक्षिण मुंबई लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ६.१० लाख मराठी, ३.४० लाख मुस्लिम, १.९५ लाख उत्तर भारतीय, २.२० लाख गुजराती व राजस्थानी, ६० हजार दक्षिण भारतीय, ३० हजार क्रिश्चियन और ५० हजार अन्य मतदाता हैं।

इसी प्रकार ठाणे जिले की ४ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाता ठाणे निर्वाचन क्षेत्र में हैं। ठाणे निर्वाचन क्षेत्र में २३ लाख से अधिक मतदाता हैं, जिसमें करीब १२ लाख मतदाता मराठी, २.५० लाख मुस्लिम, ३ लाख उत्तर भारतीय, ३ लाख गुजराती-मारवाड़ी और बाकी अन्य हैं।

कल्याण निर्वाचन क्षेत्र में मराठी २,०५,५७६, मुस्लिम ३,२८,६७५, उत्तर भारतीय १,४५,६९५, सिंधी ५५,५९०, आगरी कोली १,३८,५३०, दक्षिण भारतीय ४५,९७५, गुजराती ३२,२५९, क्रिश्चियन ६,६१७, बंगाली ५,४११, अन्य ३,७३,२९१ मतदाता हैं। भिवंडी निर्वाचन क्षेत्र में १८,५८,५१९ मतदाता हैं, जिसमें कुनबी ४,३८,९३१, मुस्लिम ३,९८,८००, आगरी २,९७,५४९, आदिवासी १,७८,९७५, बौद्ध/एसटीr १,४७,९३८, उत्तर भारतीय १,१३,९५९, मराठी १,०३,७०५, धनगर ३६,६०१, गुजराती-मारवाड़ी ३४,६७३, बंजारा २७,२२५, माली २६,२२५, क्रिश्चियन २४,६२६, सिख ११,७९१, लिंगायत ९,३६९ व ८,१५२ सिंधी मतदाता हैं। पालघर निर्वाचन क्षेत्र में कुल १८ लाख १३ हजार मतदाता हैं। आदिवासी बाहुल्य इस चुनाव क्षेत्र में करीब ६ लाख आदिवासी, ३ लाख उत्तर भारतीय, ५ लाख मराठी, २.५० लाख मुस्लिम व बाकी अन्य जाति धर्म के मतदाता हैं। उक्त दसों सीटों पर उत्तर भारतीय मतदाताओं के रुझान को देखते हुए यह तय है कि उक्त दस सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलेगा।