" /> यूपी : कोरोना किट खरीद घोटाले से फजीहत के बाद हटाए गए सात जिलों के डीएम, १५ आईएएस के तबादले

यूपी : कोरोना किट खरीद घोटाले से फजीहत के बाद हटाए गए सात जिलों के डीएम, १५ आईएएस के तबादले

• कोरोना काल में देश का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा यूपी का ‘कोरोना किट खरीद घोटाला’ !

यूपी में कोरोना किट खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले से सन्न योगी सरकार ने आखिरकार अपनी पार्टी के बीजेपी एमएलए देवमणि द्विवेदी व आप सांसद संजय सिंह के सवालों पर गौर करना शुरू कर दिया है। शुक्रवार की देर रात इसी क्रम में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया। शासन ने देर रात पंद्रह आइएएस अफसरों के तबादले कर दिए। कोरोना किट खरीद में घोटाले में संलिप्तता की आशंका में सुल्तानपुर व गाजीपुर सहित सात जिलों के डीएम को हटाते हुए उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया है। आठ जिलों में नए जिलाधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। इनमें मेरठ, इटावा, सीतापुर, ललितपुर, गाजीपुर, मऊ, संतकबीरनगर और सुल्तानपुर शामिल हैं।

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम वाराणसी के एमडी रहे के. बालाजी को मेरठ, यूपी मेडिकल सप्लाईज कारपोरेशन लखनऊ की एमडी श्रुति सिंह को इटावा, विशेष सचिव एवं स्टाफ अफसर मुख्य सचिव तथा अपर निदेशक प्रशासन राजस्व विशिष्ट अभिसूचना/अपर आवास आयुक्त उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद लखनऊ विशाल भारद्वाज को सीतापुर, विशेष सचिव नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ए. दिनेश कुमार को ललितपुर, सचिव लखनऊ विकास प्राधिकरण मंगला प्रसाद सिंह को गाजीपुर, उपाध्यक्ष मेरठ विकास प्राधिकरण राजेश कुमार पांडेय को मऊ, उपाध्यक्ष बरेली विकास प्राधिकरण दिव्या मित्तल को संत कबीर नगर और संत कबीर नगर के डीएम रवीश गुप्ता को सुल्तानपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। वहीं मेरठ के जिलाधिकारी रहे अनिल ढींगरा, इटावा के जिलाधिकारी जितेंद्र बहादुर सिंह, सीतापुर के जिलाधिकारी अखिलेश तिवारी, ललितपुर के जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ला, सुल्तानपुर की जिलाधिकारी सी.इंदुमती, गाजीपुर के जिलाधिकारी ओम प्रकाश आर्या और मऊ के जिलाधिकारी रहे ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी को हटाकर प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया है।

दो जिलों के डीपीआरओ पर कार्रवाई के बाद से ही उठ रहे थे सवाल…
कोरोना काल में देश का सबसे बड़ा घोटाला कहे जा रहे कोरोना किट खरीद घोटाले में चुनिंदा जिलों को छोड़कर यूपी के हरेक जनपद में करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ है। सबसे पहले प्रकरण को उठाया बीजेपी नेतृत्व से नाराज चल रहे एमएलए देवमणि ने।..और फिर आप सांसद संजय सिंह ने भी उनका समर्थन देकर सवाल किए व सीबीआई से जांच की मांग कर डाली।इसपर सकपकाए भ्रष्टाचार में संलिप्त अफसरों ने खुद को बचाने के लिए छोटे अफसरों को मोहरा बना दिया। सुल्तानपुर व गाजीपुर के डीपीआरओ सस्पेंड कर दिए गए। अफसरों के शातिराना ‘खेल’ को आंकते हुए इस मुद्दे पर मोर्चा खोलने वाले दोनों नेताओं ने पुनः सरकार को ट्वीट कर सवाल किए।..योगी सरकार की यह कार्रवाई उसी परिप्रेक्ष्य में बताई जा रही है।