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 यूपी पुलिस पर रंगों के महापर्व को शांतिपूर्ण निपटाने की चुनौती !

रंगों का महापर्व होली अब कुछ दिन दूर रह गया है। अगले सप्ताह पर्व को उल्लास पूर्वक को मनाने को लेकर यूपी भर में जोरशोर से तैयारियां शुरू हो चली हैं। बस्ती  जिले में पश्चिमी प्रभाव से लोकसंस्कृति के अस्तित्व को लेकर आसन्न संकट को देखते हुए फाग महोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया है। वहीं पुलिस विभाग पर उल्लास और उमंग के इस महापर्व को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने की चुनौती आन पड़ी है।

मार्च का महीना शुरू होते ही होली की मस्ती हर जगह दिखने लगी है। यूपी के हरेक जिले में मौजूदा माहौल को देखते हुए पुलिस भी कोई चूक नहीं करना चाहती। सोमवार से थानावार शांति कमेटियों की बैठकें पुलिस व प्रशासन के जिम्मेदार सीओ- एसडीएम की मौजूदगी में आयोजित की जाने लगी है। सुल्तानपुर के बल्दीराय थाने में स्वयं उपजिलाधिकारी प्रिया सिंह व सीओ लालचंद्र चौधरी ने बैठक में हिस्सा लिया। हिन्दू-मुस्लिम दोनों को आश्वस्त किया कि पर्व परंपरा के अनुरूप ही समन्वय से मनाया जाएगा। सभी एकदूसरे की सुविधा असुविधा का ख्याल रखते हुए इसे उल्लास पूर्वक मनाएं।

असामाजिक तत्वों के द्वारा किसी भी तरह का खलल पैदा होने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें। नशेड़ियों पर भी लगाम लगाई जाय। प्रतापगढ़, अमेठी, अंबेडकरनगर व बस्ती आदि जिलों में भी पीस कमेटियों की बैठकों में नागरिकों की खासी उपस्थिति हो रही है। पूर्वी यूपी के बस्ती जिले में लोक संस्कृति के संरक्षण में एक और विशेष पहल आम नागरिकों की ओर से हो रही है।बदलते परिवेश में होली की फ़ाग गीत के प्रति जहां युवा पीढ़ी का रुझान कम हो रहा है। अपनी धरोहर को संरक्षित करने के लिए  सामाजिक संस्था बस्ती विकास समिति ने ८ मार्च को फ़ाग उत्सव के आयोजन का निर्णय लिया है। समिति संरक्षक डा वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि लुप्त होती फगुआ गायन की परंपरा जनपद की पहचान है।  फ़ाग गीतों के महान रचयिता रंगपाल की भूमि बस्ती ही है। इसलिए बस्ती विकास समिति ने इसे जीवंत करने का बीड़ा उठाया है। भंग और रंग में सरोबार होकर पूरे वर्ष के गिले शिकवे भूल ढोल मजीरों के साथ टोली बनाकर पखवारे पूर्व से ही एक दूसरे के घर जाकर फगुआ गाना  अब सपना होता जा रहा है। हमारा मकसद साफ है परंपरा और संस्कृति कायम रहे।