यूपी में आतंक का आईएसआई कनेक्शन

 अखिलेश-माया के राज में जेल से छोड़े गए आतंकी घटनाओं में लिप्त आरोपी

देवबंद से पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से मिले सुराग के बाद यूपी एटीएस ने आधे से ज्यादा प्रदेश में पैâले आईएसआई के नेटवर्क को खंगाल रही है। पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा यूपी के अधिकांश जिलों में सक्रिय आईएसआई का नेटवर्क आतंकवादियों को प्रदेश भर में सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करा रहा है। इसके लिए एटीएस ने प्रदेश की जेलों में आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में बंद यूपी की जेलों में बंद लगभग ६० विदेशी आतंकियों में से चिन्हित हार्डकोर आतंकियों से पूछताछ के लिए कानूनी प्रक्रिया कर रही है। इस संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार प्रीती गोयल का कहना है कि प्रदेश में मायावती सरकार (२००७-२०१२) के कार्यकाल के दौरान यूपी के २७ जिलों में पैâल चुका आईएसआई का नेटवर्क अखिलेश सरकार के कार्यकाल (२०१२-२०१७) के दौरान यूपी के ३२ जिलों में पैâल गया था। पिछली सरकारें आतंकवादियों की गिरफ्तारी को लेकर इतना प्रतिबद्ध नहीं दिखी। परिणामस्वरूप प्रदेश की जेलों में बंद आतंकी घटनाओं में लिप्तता के आरोप में गिरफ्तार जेलों में सड़ रहे १४ आरोपी केवल मायावती और अखिलेश यादव की सरकार में जेल से छूटने में कामयाब हो गए थे। उस समय की तत्कालीन राज्य सरकार के सरकारी वकीलों पर आतंकियों के खिलाफ नरम पैरवी करने का आरोप लगा था जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार (मार्च २०१७ से अब तक) एक भी आतंकवादी घटनाओं की लिप्तता के आरोप में बंद एक भी आरोपी न्यायालय से नहीं छूट पाया है। आतंकित गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में यूपी की जेलों में बंद सर्वाधिक आरोपी अखिलेश यादव की सरकार में छूटे थे। आतंकी मामलों में आरोपी रहे लोगों को बेगुनाह मान कर छुड़ाने के लिए लड़ने वाले रिहाई मंच के एडवोकेट मोहम्द सोएब ने सामना संवाददाता को बताया कि पहला आरोपी आफताब आलम अंसारी सबसे पहले २००८ में मायावती सरकार के दौरान छूटा था। उसके बाद अखिलेश यादव की सरकार में १३ लोग छूटे, ज्यादा तर लोग २०१६-१७ में छूटे थे। गौरतलब हो कि जेलों में बंद पाकिस्तानी आरोपी यूपी में पैâले आईएसआई के स्लीप मॉड्यूल्स से जुड़ कर स्थानीय नेटवर्क को सक्रिय बनाए रखे हैं। अब इनमें से अधिकांश हार्डकोर लोग एटीएस और एनआईए के राडार पर हैं, भले ही वह जेलों में हैं। महानिदेशक कारगर चंद्रप्रकाश के अनुसार प्रदेश की जेलों में लगभग ६० विदेशी आतंकी घटनाओं की लिप्तता के आरोप में बंद हैं, जिनमें लगभग २० पाकिस्तान और २-३ बांग्लादेश के हैं। जब तक प्रदेश में टाडा कानून था तब तक इन्हें चिन्हित करना आसान होता था आजकल कई ऐसे मामले हैं जिनमें आतंकी धाराओं में तो लोग जेल में हैं लेकिन वह न तो विदेशी हैं और न ही सब के सब हार्डकोर हैं। आतंकी मामलों को रिहा कराने के लिए काम करनेवाले रिहाई मंच के मोहम्मद शोएब कहते हैं कि एनआईए और एटीएस द्वारा इस सरकार में इस समय लगभग ३० लोगों को पकड़ा गया है, लोकसभा चुनाव २०१९ जैसे-जैसे निकट आएगा यह संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि मोदी और योगी की जोड़ी देशभक्ति के नाम पर राजनीति करते हैं। फिलहाल यह मेरे लिए कोई आश्चर्य नहीं होगा।