यूपी में काय पो छेऽऽऽ, सपा-बसपा के मजबूत मांझे से भाजपा की कटी पतंग

सर्वे ने बताया ४४ सीटों का नुकसान
लोकसभा चुनाव में अब चंद महीने ही बाकी हैं और सभी की निगाहें यूपी की ओर लगी हैं जहां बड़ी तेजी से समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं। सपा और बसपा के गठबंधन होने के बाद प्रदेश में भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश के इस सबसे बड़े प्रदेश में सबसे ज्यादा ८० सीटें हैं और ये ही सीटें तय करती हैं कि केंद्र में किसकी सरकार बननेवाली है। पिछली बार तो मोदी लहर में भाजपा ने यहां से ७१ सीटें जीती थीं पर इस बार के हालात जुदा हैं। मकर संक्रांति का अवसर है और इंडिया टीवी-सीएनएक्स का जो पहला ओपिनियन पोल आया है उसने तो यूपी में भाजपा का ‘काय पो छेऽऽऽ…’ कर दिया है। गुजराती में पतंग कटने पर ‘काय पो छेऽऽऽ’ कहा जाता है।
अभी कुछ दिनों पहले तक यूपी में सपा और बसपा का गठबंधन काफी मुश्किल चीज लग रही थी। पर राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता। बुआ और बबुआ में सुलह हो गई और प्रदेश की तस्वीर बदल गई। अब अगर इंडिया टीवी के सर्वे पर गौर किया जाए तो यह तय है कि सपा-बसपा के मजबूत मांझे से भाजपा की पतंग कटनेवाली है। सर्वे के मुताबिक लोकसभा चुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगनेवाला है और उसे २०१४ के मुकाबले ४४ सीटों का तगड़ा नुकसान होनेवाला है। दूसरी तरफ २०१४ में जिस सपा-बसपा को सिर्फ ५ सीटों पर ही सिमट जाना पड़ा था, उसे इस बार ४९ सीटों का बड़ा खजाना मिलनेवाला है। सर्वे के अनुसार सपा-बसपा के इस गठबंधन में सपा का प्रदर्शन बसपा से बेहतर रहने के चांस हैं।
इंडिया टीवी-सीएनएक्स ने आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए यूपी में चुनावी सर्वे किया है। यह पहला ओपिनियन पोल है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस ओपिनियन पोल को देखकर भाजपा नेताओं की नींद उड़ गई है। २०१९ के इस पहले ओपिनियन पोल में यूपी में भाजपा को २०१४ की तुलना में बड़ा नुकसान होता दिख रहा है। इस ओपिनियन पोल के मुताबिक अगर सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात करें तो वहां यदि अभी लोकसभा के चुनाव कराए जाएं तो प्रदेश की कुल ८० सीटों में से भाजपा को २९ सीटें, जबकि सपा-बसपा गठबंधन को ४९ सीटें व कांग्रेस को २ सीटें मिलेंगी।
वहीं वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को ३७ फीसदी, बसपा को १९ फीसदी, समाजवादी पार्टी को २३ फीसदी, कांग्रेस को १० फीसदी और अन्य को ११ फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। बता दें कि २०१४ के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने बड़ी सफलता अर्जित की थी।
लोकसभा की ८० सीटों में से उसे ७१ सीटें मिली थी, जबकि उसकी पार्टी अपना दल को दो सीटों पर सफलता मिली थी। समाजवादी पार्टी ५ सीटें हासिल कर पाई थी जबकि बसपा का खाता तक नहीं खुल पाया था। कांग्रेस को महज २ सीटों पर संतोष करना पड़ा था।