" /> यूपी में नहीं बिका दूध तो दुग्ध संघ ने बना डाला 25 टन घी और 21 टन मक्खन

यूपी में नहीं बिका दूध तो दुग्ध संघ ने बना डाला 25 टन घी और 21 टन मक्खन

लॉकडाउन में खपत कम होने के कारण दुग्ध संघ का करीब 19 हजार लीटर दूध बाहर नहीं जा पा रहा है। दूध खराब होने से बचाने के लिए दुग्ध संघ ने मक्खन और घी बनाना शुरू कर दिया है लेकिन एक माह से अधिक समय में तैयार कर रखा 21 टन मक्खन और 25 टन घी भी लॉकडाउन में फंस गया है। इसकी वजह से दुग्ध संघ के समक्ष दुग्ध समितियों से खरीदे जा रहे दूध की कीमत देने का संकट तो गहराता जा रहा है। खास बात यह है कि दुग्ध संघ के पास अब सिर्फ नौ टन और मक्खन रखने की व्यवस्था है। प्रतिदिन करीब 800 किलो मक्खन तैयार होता है। ऐसे में यदि लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो दुग्ध संघ के पास मक्खन रखने की भी समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

जिले में करीब 1.10 लाख लीटर दूध की खपत है और करीब दो लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से अकेले करीब 23-25 हजार लीटर दूध सहकारी दुग्ध संघ जिलेभर की करीब 250 दुग्ध उत्पादन समितियों से क्रय कर लेता है। इसमें से प्रतिदिन पांच से साढे पांच हजार लीटर दूध पराग के पैक में शहर अथवा कस्बों में बेच दिया जाता है। शेष दूध दिल्ली की मार्केट में दुग्ध संघ बेच देता है। लॉकडाउन के बाद चाय, मिठाई के होटल व रेस्टोरेंट आदि बंद होने से दूध की डिमांड एकाएक कम हो गई, जिसके चलते दुग्ध संघ का दूध दिल्ली में नहीं बिक पा रहा है। शुरू में एक दो दिन तो दुग्ध संघ के अधिकारी हालात सामान्य होने की उम्मीद में दूध को एकत्र करते रहे। शहर में खपत बढ़ाने को दूध पर प्रति लीटर दो रुपए मूल्य घटाया भी, इससे करीब एक हजार लीटर दूध की खपत बढ़ी भी लेकिन इसके बाद भी करीब 19-20 हजार लीटर दूध के बचने के कारण अधिकारियों को चिंता सताने लगी। अनुबंध के चलते समितियों से दूध लेना मजबूरी भी थी लेकिन प्लांट पर कुल एक लाख लीटर क्षमता दूध रखने की थी। लिहाजा अधिकारियों ने बच रहे दूध का मक्खन और घी तैयार करवाना शुरू करा दिया। अब तक 21 टन मक्खन और 25 टन घी तैयार हो चुका है लेकिन लॉकडाउन के कारण यह भी फंसा हुआ है।

इसके न बिक पाने के कारण दुग्ध संघ पर दुग्ध समितियों का करीब डेढ़ करोड़ रुपए भुगतान भी बाकी हो गया है। दुग्ध संघ के पास 30 टन मक्खन और 50 टन घी रखने की क्षमता है। दुग्ध संघ के पास बचे दूध से प्रतिदिन करीब 800 किलो मक्खन तैयार हो रहा है। अफसरों को चिंता यह सता रही है कि यदि लॉकडाउन की अवधि बढ़ी तो मक्खन और घी रखने की क्षमता भी जवाब देने लगेगी। साथ ही दुग्ध समितियों से जुड़े किसानों का बकाया पैसा भी बढ़ता जाएगा।

दुग्ध संघ के जीएम दलजीत सिंह कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण दिल्ली बिकने के लिए प्रतिदिन जानेवाला करीब 19-20 हजार लीटर दूध नहीं जा पा रहा है। दूध समितियों से लेना मजबूरी है। दूध को खराब होने से बचाने के लिए मक्खन और धी तैयार कर रखा जा रहा है। 21 टन मक्खन और 25 टन घी तैयार हो चुका है। समितियों का करीब 1.50 करोड़ रुपए भुगतान बाकी है। करीब दो करोड़ का प्रोडक्ट संघ के स्टॉक में है। समितियों को कुछ भुगतान डेली बिकनेवाले दूध से मिली रकम से किया जा रहा है। पूर्ण भुगतान के लिए शासन स्तर पर विकल्प तलाशे जा रहे हैं।