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यूपी में पोस्टर वॉर!

यूपी में इस समय पोस्टर वॉर शुरू हो गया है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुई हिंसा के आरोपियों से वसूली के लिए लगे होर्डिंग्स पर अब राजनीति शुरू हो गई है। इन होर्डिंग्स के जवाब में पहले सपा ने पूर्व सांसद चिन्मयानंद और पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के पोस्टर लगाकर इन्हें प्रदेश की बेटियों का आरोपी बताया था। अब कांग्रेस भी इस पोस्टर वॉर में कूद गई है। वसूली के लिए लगे सरकारी होर्डिंग्स पर कांग्रेस की ओर से पोस्टर लगाया गया है, इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का फोटो लगाकर सवाल पूछा गया है कि ‘इन दंगाइयों से वसूली कब?’
गुरुवार रात सपा नेता आईपी सिंह ने दुष्कर्म मामले में दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और एक अन्य यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद की फोटो वाले बैनर लगवाए थे। ये बैनर योगी सरकार द्वारा लगवाए गए वसूली वाले बैनर-पोस्टर के बगल में लगे थे। हालांकि पुलिस ने शुक्रवार सुबह तक सभी बैनर पोस्टरों को हटा दिया।
बता दें कि १९ दिसंबर, २०१९ को लखनऊ में हुई हिंसा में पुलिस ने ५७ लोगों को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोपी बनाया था। इन लोगों के फोटो, नाम और पते के होर्डिंग्स सार्वजनिक जगहों पर लगाई थी। इसमें इन लोगों से ८८ लाख ६२ हजार ५३७ रुपए के नुकसान की भरपाई कराने की बात कही गई थी। मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए आरोपियों के बैनर-पोस्टर १६ मार्च से पहले हटाने का आदेश दिया था। यूपी सरकार ने हाईकोर्ट के पैâसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पोस्टर के हटाने के पैâसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की वेकेशन बेंच में इस मामले में सुनवाई हुई।