" /> येऊर के जंगलों की ड्रोन से निगरानी : लॉकडाउन में अवैध गतिविधियों पर लगेगी लगाम

येऊर के जंगलों की ड्रोन से निगरानी : लॉकडाउन में अवैध गतिविधियों पर लगेगी लगाम

59 वर्ग किमी में फैला है जंगल
कर्मचारियों के समय की होगी बचत
घुसपैठियों में पैदा होगा खौफ
शहर के स्वच्छ पर्यावरण में येऊर के जंगलों का महत्वपूर्ण योगदान है। लॉकडाउन का फायदा उठाकर जंगलों के अंदर घुसपैठ कर अनेक तरह की अवैध गतिविधियों के चलने का खुलासा हुआ है, लिहाजा अब ड्रोन कैमरे की मदद से अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने तथा जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने का काम शुरू कर दिया गया है। इससे न केवल कर्मचारियों के समय की बचत हो रही है बल्कि सबूतों के अभाव में न्यायालय से बाइज्जत बरी होनेवाले आरोपियों को सजा दिलाने का भी रास्ता साफ हो गया है।
येऊर से लेकर तुङ्गेश्वर तक वन क्षेत्र पर ड्रोन की नजर
येऊर से लेकर तुङ्गेश्वर तक करीब 59 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले जंगलों में अवैध रूप से घुसपैठ कर शराब बनाने, अतिक्रमण कर घर बनाने, पेड़ काटने तथा जानवरों का शिकार करने का प्रयास करने जैसे अनेक मामले लॉकडाउन के दौरान प्रकाश में आ चुके हैं और आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की गई है। जंगलों पर नजर रखने के लिए तकनीक के उपयोग की आवश्यकता को लेकर 30 अप्रैल को येऊर एनवायरमेंटल सोसायटी के संस्थापक रोहित जोशी के साथ वन अधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें जोशी ने जंगलों की निगरानी हेतु मुफ्त में ड्रोन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिकारियों तथा कर्मचारियों को संचालन हेतु ड्रोन की तकनीक से प्रशिक्षित किया गया और 11 मई को येऊर स्थित नव निर्मित कंट्रोल सेंटर में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) पश्चिम विभाग सुनील लिमये के हाथों इसका उद्घाटन कर दिया गया।
घुसपैठियों में फैलेगा खौफ, कर्मचारियों के समय की वचत
जंगलों पर ड्रोन से निगाह रखने पर कर्मचारियों के समय की 80 प्रतिशत वचत हो रही है। किसी तरह की अवैध गतिविधियों का पता चलते ही वन कर्मचारियों तथा अधिकारियों को मौके पर पहुंचना अब आसान हो गया है और आरोपी पकड़े भी जा रहे हैं। इतना ही नहीं सबूतों के अभाव में कोर्ट से बरी हो जाने का जो सिलसिला चल रहा है, उस पर विराम लगने की पूरी संभावना है। आरोपियों की अवैध गतिविधियां कैमरे में कैद हो जाएंगी। इस आधार पर जब उन्हें कोर्ट से सजा मिलने लगेगी तब उनमें खौफ का माहौल पैदा हो जाएगा और घुसपैठ की घटनाओ में कमी आएगी, ऐसी उम्मीद वन विभाग द्वारा की जा रही है।