ये कंडोम कंडम है, ५ प्रतिशत में गड़बड़

कंडोम का ईजाद वैसे तो गर्भनिरोधक के तौर पर हुआ था लेकिन अब इसका इस्तेमाल सुरक्षित यौन संबंध के लिए भी किया जाता है। कंडोम को सबसे सेफ और नो साइड इफेक्ट वाला विकल्प माना जाता है लेकिन हाल ही में सेंट्रल ड्रग टेस्टिंग लैब (सीडीएलटी) द्वारा देशभर में बिकनेवाले कंडोम के सैंपल लिए गए और उनकी गुणवत्ता की जांच की गई। आपको जानकर हैरानी होगी कि जांच में ५ प्रतिशत से अधिक कंडोम कंडम निकले। स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कहीं न कहीं जांच प्रशासन द्वारा लापरवाही की बात कही है।
बता दें कि कंडोम सबसे सुरक्षित माना जाता है। फिर चाहे वह गर्भनिरोधक के रूप में इस्तेमाल हो या फिर एड्स/एचआईवी, हेपेटाइटिस बी व सी या गुप्त रोग से बचने के लिए। अब बाजार में बिकनेवाला कंडोम कितना सुरक्षित है? इसकी जांच के लिए गत वर्ष जून में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने चेन्नई स्थित सीडीएलटी को कंडोम के गुणवत्ता को जांचने का आदेश दिया था। आरटीआई द्वारा मिली जानकारी में सीडीएलटी द्वारा मुंबई सहित अन्य राज्यों से जून, २०१८ से अप्रैल, २०१९ तक कुल ३८४ सैंपल लिए गए, जिसमें से जांच में २२ कंडोम गुणवत्ता के टेस्ट में फेल हो गए। कोई फट गया तो किसी के लीक होने की बात सामने आई। विशेषज्ञों ने कहा कि यह गंभीर बात है कि जिसे सुरक्षित माना जाता है वह खुद टेस्ट में असफल है।
टीबी, एचआईवी कार्यकर्ता गणेश आचार्य ने कहा कि यह गंभीर मामला है, सरकार को इस जांच को गंभीरता से लेते हुए निरंतर जांच करनी चाहिए और जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। कंडोम का इस्तेमाल काफी बढ़ रहा है, जो कि अच्छी बात है लेकिन क्वॉलिटी ठीक नहीं तो इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। कहीं न कहीं जांच एजेंसियों द्वारा लापरवाही बरती जा रही है। एड्स नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार जब भी कंडोम खरीदती है तो वह इस बात का ध्यान रखती है कि हर बैच की गुणवत्ता अच्छी हो। तय किए गए मानकों पर खरे उतरने के बाद ही खरीदी की जाती है लेकिन बाजार में बिकनेवाले कंडोम की गुणवत्ता को कौन और कितना जांचता है? यह पता नहीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए गुणवत्ता को लेकर कड़ी जांच और निगरानी रखने की जरूरत है। हालांकि सीडीएलटी ने जांच में फेल हुए कंडोम की कंपनियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया है।