ये तेरा पुल, वो मेरा पुल, सुसाइड स्पॉट बन गए समुद्री पुल

बीते सोमवार को वाशी पुल से खाड़ी में कूदी एक महिला को मछुआरों ने बचा लिया था। इसके कुछ ही घंटे बाद बांद्रा निवासी शख्स के खाड़ी में कूदने की खबर सामने आ रही है। इससे यह साबित होता है कि मुंबई की लोकल ट्रेनों के बाद वर्ली सी-लिंक, वाशी और भाइंदर खाड़ी (समुद्री) पुल दूसरा बड़ा सुसाइड स्पॉट बनते जा रहे हैं। हर साल करीब दो दर्जन से ज्यादा लोग समुद्री पुलों से कूदकर खुदकशी का प्रयास करते हैं। इन पुलों के इर्द-गिर्द मछली पकड़नेवाले मछुआरे दर्जनों ऐसे हताश-निराश लोगों की जान बचाते हैं।
सी-लिंक अमीरों का फेवरेट
समुद्री पुलों से खुदकशी के मामलों में एक खास बात देखने को मिलती है। सी-लिंक से कूदनेवाले ज्यादातर लोग अमीर होते हैं। वे अपनी कारों से पुल पर पहुंचते हैं और कार पुल पर रोककर समुद्र में कूद जाते हैं। ये लोग प्राय: बीमारी या व्यवसाय में नुकसान के कारण ऐसा करते हैं। दोपहिया वाहनों तथा पादचारियों को सी-लिंक पर प्रवेश की इजाजत नहीं होना भी इसकी एक बड़ी वजह है।

वाशी पुल गरीबों की पसंद

‘मैं कर्ज में डूब गया हूं इसलिए जान दे रहा हूं।’ ये आखिरी शब्द बांद्रा निवासी उस शख्स के हैं, जिसके सोमवार की रात वाशी पुल से खाड़ी में कूदकर खुदकशी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। बांद्रा निवासी उक्त शख्स रात ९ बजे वाशी पुल पर पहुंचा था, अपनी स्कूटी पुल पर खड़ी करके वह खाड़ी में कूद गया। उक्त शख्स का नाम संजय पुजारा बताया जा रहा है। उस समय समुद्र में हाई टाइड होने के कारण दमकलकर्मी, पुलिस और मछुआरे उसे बचा नहीं पाए। पुल पर मिली स्कूटी में वाशी पुलिस को एक पर्स, मोबाइल फोन, आधार कार्ड और सुसाइड नोट मिला है। फोन की जांच करने पर पता चला है कि पुजारा ने कर्ज और बीमारी से परेशान होकर खुदकशी करने से संबंधित संदेश व्हॉट्सऐप पर अपने एक दोस्त को भेजा था। ऐसे दर्जनों हताश-निराश, बीमार गरीब लोग हर साल वाशी पुल पर जान देने पहुंचते हैं। सोमवार को दोपहर में एक ऐसी ही महिला को मछुआरों ने बचाया था। पिछले ४ वर्षों में ऐसा प्रयास करनेवाले लगभग दो दर्जन से ज्यादा लोगों को मछुआरों ने बचाया है। १९ जुलाई, २०१८ को नेरुल निवासी एचएससी के छात्र ने वाशी पुल से कूदकर अपनी जान दे दी थी। २४ जुलाई को उसकी लाश वाशी क्रीक इलाके में मिली थी। इसी तरह सितंबर महीने में वडाला निवासी १७ वर्षीय नमन दत्ता की लाश एलिफेंटा के पास मिली थी। अनुमान है कि वह लोकल ट्रेन से वाशी खाड़ी में कूदा था। इसी तरह वर्ष २०१५ में २१ तथा २०१६ में १५ लोगों ने खुदकुशी का प्रयास किया था, जिनमें से २२ लोगों को बचा लिया गया था। फिलहाल वाशी पुल पर खुदकशी रोकने के लिए पुल की ऊंची बैरीकेडिंग का प्रस्ताव विचाराधीन है।