" /> `ये देखकर मेरा दिल उदास हो जाता है!’- अखिलेंद्र मिश्रा

`ये देखकर मेरा दिल उदास हो जाता है!’- अखिलेंद्र मिश्रा

दर्जनों हिंदी फिल्मों में काम करनेवाले अखिलेंद्र मिश्रा ने जिस किसी भी धारावाहिक में काम किया, वे बेहद चर्चित रहीं। धारावाहिक `चंद्रकांता’ में क्रूर सिंह के किरदार को जीवंत करनेवाले अखिलेंद्र मिश्रा ने २००८ में प्रसारित हुए धारावाहिक `रामायण’ में रावण का किरदार निभाया। अपने किरदारों से दर्शकों का मन मोह लेनेवाले अखिलेंद्र मिश्रा की `रामायण’ इन दिनों `दंगल’ टीवी पर प्रसारित हो रही है। पेश है अखिलेंद्र मिश्रा से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

पिछले ढाई महीने से लॉकडाउन के दौरान आपकी दिनचर्या कैसी रही?
देश के हर नागरिक की तरह मैं भी अपने परिवार के साथ घर में ही हूं। परिवार के साथ रहने के बावजूद अकेला हूं। यानी मैं खुद की खोज में हूं। इस बात का अहसास हुआ कि कम-से-कम चीजों से भी जिंदगी की गुजर-बसर हो सकती है। बाहरी दुनिया का कोई आकर्षण अब नहीं रहा। कोरोना लॉकडाउन प्रकृति द्वारा दिया गया मौका है कि ‘हे इंसान अब तो जान ले, कुदरत, सृष्टि, प्रकृति, ब्रह्मांड के बारे में!’

दंगल’ टीवी पर आपके द्वारा निभाए गए रावण के किरदार को आप किस तरह याद करते हैं?
मुझे फोन आया कि रामानंद सागर के पुत्र आनंद सागर मुझसे मिलना चाहते है। लेकिन मैं फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त था इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। सागर साहब के पहलेवाले `रामायण’ में अरविंद त्रिवेदी ने रावण की भूमिका साकार की थी। खैर, उनके द्वारा निभाया गया रावण का किरदार बेमिसाल था, जिसे भूला पाना आसान नहीं है। रावण का किरदार मैं कैसे पेश करूं ताकि इन दो रावणों की कोई तुलना न हो, ये सवाल मेरे सामने था। मैंने आनंद जी से कहा कि मैं रावण का किरदार अपनी सोच से निभाऊंगा। अरविंद त्रिवेदी द्वारा निभाए गए और मेरे द्वारा निभाए गए रावण के किरदार को देखने के बाद ही मेरी बात स्पष्ट होगी।

`रामायण’ से क्या सीख लेनी चाहिए?
आज समाज में ढेर सारे रावण घूम रहे हैं, जो समाज को क्षति पहुंचाने के साथ हमारी संस्कृति को तहस-नहस कर रहे हैं। इन रावणरूपी समाज कंटकों का राममय होना जरूरी है। ये इंसानों के हाथ है कि वो कौन-सा रास्ता अख्तियार करें। मनुष्य पशु से बदतर होता जा रहा है, ये देखकर मेरा दिल उदास हो जाता है।

अपने करियर के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
फंतासी शो `चंद्रकांता’ में क्रूर सिंह ने मुझे एक अलग पहचान दी और सीरियल `उड़ान’ भी कामयाब रही। `डिस्कवरी इंडिया’ शो के बाद सलमान खान की फिल्म `वीरगति’ मेरी डेब्यू फिल्म थी। आमिर खान अभिनीत फिल्म `सरफरोश’ में मिर्ची सेठ का मेरा किरदार सराहा गया। `तरकीब’, `लगान’, `लीजेंड ऑफ भगत सिंह’, यश जी की फिल्म `वीरजारा’, `गंगाजल’, `रेडी’ इन सभी फिल्मों को मैं अपनी यादगार फिल्में मानता हूं। नामी निर्देशकों और नामचीन स्टार्स के साथ काम करके मैंने उनसे कुछ-न-कुछ सीखा है।

क्या आपको इंडस्ट्री में अपना मकाम मिल गया?
मेरी जरूरत दो रोटी और एक घर की थी। अभिनय के कई सालों बाद भी मेरी जरूरतें नहीं बदली और मेरी जरूरतों में इजाफा भी नहीं हुआ। पैसा कमाना और अमीर बनना कभी मेरा लक्ष्य नहीं रहा। शायद इसीलिए मेरी जिंदगी में ठहराव है और मैं इससे संतुष्ट हूं। हां, क्रिएटिव सेटिस्फैक्शन के लिए अच्छे किरदारों की तलाश रहेगी।