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ये संघर्ष जरूरी है! -अमृता खानविलकर

मराठी फिल्मों की सुपरस्टार अमृता खानविलकर पिछले ३ वर्षों से
बॉलीवुड में काम करने लगी हैं। अमृता अभिनीत फिल्म ‘राजी’ जहां सुपरहिट हुई, वहीं ‘सत्यमेव जयते’ को सफलता मिली और पिछले सप्ताह रिलीज फिल्म ‘मलंग’ भी कमर्शियली लागत निकाल ले गई। अमृता को बॉलीवुड में लकी एक्टर माना जा रहा है। इस समय अमृता ‘कलर्स’ चैनल के ‘फियर पैâक्टर- खतरों के खिलाड़ी’ इस रियलिटी शो में बतौर कंटेस्टेंट हिस्सा ले रही हैं। पेश है अमृता खानविलकर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

आप फिल्मों के साथ वेब सीरीज में व्यस्त हैं। इसके बावजूद ‘फियर पैâक्टर’ करने की कोई खास वजह?
‘खतरों के खिलाड़ी’ का ये दसवां सीजन है। मैं इस शो की पैâन हूं। ये सारे स्टंट करना मेरे बस की बात नहीं लेकिन उन्हें देखना मुझे रोमांचित करता है। मुझे थ्रिल पसंद है और जब मुझे इस शो के लिए फोन आया तो मैंने अपनी रजामंदी दे दी।
आपकी सुरक्षा को लेकर घरवाले चिंतित नहीं हुए?
मेरी मां मुझे जानती हैं इसलिए उन्होंने आपत्ति नहीं की। मेरे पति हिमांशू मल्होत्रा ने ‘कलर्स’ की टीम से जरूर कई सवाल किए।
क्या आपको पता है कि आपको कौन-से स्टंट करने पड़ेंगे?
हमें कौन-सा स्टंट करना है इसकी जानकारी हमें नहीं होती। जब सारे कंटेस्टेंट लोकेशन पर पहुंचते हैं और जब उनका नाम पुकारा जाता है तब जाकर उन्हें पता चलता है कि उन्हें क्या करना है। मुझे चलती ट्रेन के ऊपर ‘छैंया छैंया’ डांस करना था, उसे मैंने किया लेकिन हेलिकॉप्टर से कूदना बहुत मुश्किल था।
अगर आप शो से आउट हुईं तो?
जो मेरे लिए संभव था, उसे मैंने किया लेकिन जो असंभव था उसे मैं नहीं कर पाई। जो मेरे लिए संभव नहीं था, उसे मैंने छोड़ दिया।
इस शो के लिए आपने  कैसी तैयारी की?
मैंने खुद का स्टैमिना बढ़ाने के लिए बहुत फिजिकल ट्रेनिंग ली। बॉडी को टोन्ड रखा और रनिंग, कार्डियो जिमिंग, प्राणायाम-योगा सब किया। ऊर्जा बढ़ाने के हरसंभव प्रयास किए और खुद को एक्टिव भी रखा।
‘मलंग’ की सफलता का आपको कितना फायदा मिला?
फायदा? ऐसा किसी को कोई खास फायदा नहीं मिलता आज के दौर में। अब मुझे मेरी पहचान नहीं बतानी पड़ती। मेरा नाम हुआ है लेकिन घर बैठे कोई प्रोजेक्ट नहीं मिलता। लगातार ऑडिशंस, स्क्रीन टेस्ट और मेकर्स-प्रोडक्शन हाउसेस से मिलना आज भी चल रहा है। इन प्रयासों से मुझे कोई गुरेज नहीं है।
क्या आप इसे स्ट्रगल नहीं मानतीं?
अगर ये स्ट्रगल है तो है। मुझे दिनभर में सौ लोगों से मिलना, काम मांगना, ऑडिशन देना गलत नहीं लगता। मैं खुद को बतख मानती हूं। जब बतख पानी पर तैरती है तो कोई नहीं जानता की उसके पैर लगातार पानी के नीचे स्ट्रगल करते हैं और ये संघर्ष जरूरी है।