ये सड़क तो जान लेती है!, १ साल में १३ हजार लोगों की दुर्घटनाओं में मौत

महाराष्ट्र सरकार सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तरह-तरह की मुहिम चलाती है, इसके वाबजूद राज्य में हर घंटे एक व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत होती है। इतना ही नहीं हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मरनेवालों में इजाफा हो रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में जितनी भी मौतें होती हैं, उनमें ८०³ मौतें मानवीय गलती के कारण होती हैं और मरनेवालों में ६६ प्रतिशत लोग २५ से ४५ वर्ष की उम्र के होते हैं। राज्य में पिछले वर्ष २०१८ में कुल ३० हजार सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिसमें १३ हजार ५९ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन १३ हजार में ११ हजार लोगों की मौत उनकी गलती के कारण हुई थी। परिवहन विभाग की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार वर्ष २०१६ में १२ हजार ९३५, २०१७ में १२ हजार ५११ और २०१८ में १३ हजार ५९ लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई थी यानी हर साल सड़क दुर्घटनाओं में मरनेवालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वजह चाहे जो भी हो पर यह कहना पड़ेगा कि ये सड़कें जान लेती हैं।
परिवहन आयुक्त शेखर चन्ने ने भी स्वीकार किया कि राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में ०.३६ प्रतिशत की कमी आई है परंतु दुर्घटनाओं में मरनेवालों की संख्या में ४ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मरनेवालों में मोटरसाइकिल सवार, पैदल चलनेवाले आदि का समावेश है। मुंबई में सीसीटीवी के कारण तेज रफ्तार से वाहन चलानेवालों को पकड़ने में यातायात पुलिस को आसानी हुई है। वर्ष २०१७ में ४१ हजार वाहनचालकों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी जबकि वर्ष २०१८ में ७ लाख ७० हजार लोगों के खिलाफ कार्रवाई राज्य में की गई थी। राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर रावते ने वाहनचालकों से आह्वान किया है कि यातायात नियम का पालन करें और दुर्घटना से बचें।