योगराज गुगुल खाएं झुनझुनी भगाएं

मेरे बाएं हाथ में झुनझुनी रहती है और इसमें दर्द भी रहता है। मुझे बॉर्डर लाइन का ब्लड प्रेशर भी है। उसके लिए दवा पहले खाता था परंतु अब दवाएं बंद हैं। मेरी उम्र ५६ वर्ष है। झुनझुनी के कारण काम नहीं कर पाता हूं। उपचार व औषधि बताएं?
-महानंद वर्मा-कांदिवली
झुनझुनी लक्षण यह वायु का विकार है। ४० वर्ष की उम्र के बाद वाले लोगों में हाथ व पैर में झुनझुनी होना यह विकार प्राय: देखा जाता है, जो कि अपने आप कई बार कम व ज्यादा होता रहता है। आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार ज्ञानतंतुओं व नाड़ी तंतुओं में क्षोभ व दबाव पड़ने के कारण यह विकार होता है।
पत्र के वर्णन व लक्षणों से स्पष्ट है कि आपको ‘सरवाइकल स्पांडीलोसीस’ (मन्यागतवात) हुआ है। आप अपने गले का (सरवाइकल एक्स-रे) क्ष-किरण करवाएं। उसकी रिपोर्ट में कोई असाधारण बात हो तो हमें पुन: लिख भेजें अथवा अपने डॉक्टर से संपर्क कर मार्गदर्शन लें।
योगराज गुगुल, आरोग्यवर्धनी वटी की २-२ गोलियां दिन में ३ बार गरम पानी से लें। महारास्नादि काढ़ा ६-६ चम्मच २ बार भोजन के बाद समप्रमाण पानी मिलाकर लें। गले प्रदेश व हाथों की नारायण तेल से मालिश कर सेंक करें। यह औषधोपचार नियमित रूप से ४ से ६ मास तक लें।
अपने ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कराते रहें। इस प्रकार की व्याधियों में व्यायाम व योगाभ्यास भी चिकित्सा का एक अंग है। वैधकीय निरीक्षण में व्यायाम करें। यदि आप मोटे हैं तो अपने वजन को भी कम करने की कोशिश करें। फास्ट फूड, दिन में सोना, प्रâाइड फूड आदि बंद करें।
मेरी उम्र २५ वर्ष की है। मेरे गले के पास पिछले २ महीने से छोटी-मोटी मटर के आकार की गांठे हैं, जिन्हें दबाने पर दर्द होता है। बुखार, वजन कम होना या अन्य कोई तकलीफ नहीं है। शरीर का वजन भी ५६ किग्रा है परंतु हाथ लगाने पर दर्द हो जाता है। यह कौन-सी गांठ है। इसे खत्म करने का उपाय बताएं?
-जयशंकर – ग्रांट रोड
गले के पास गांठ कई कारणों से आ सकती है। इसे ‘लिफेंडिनाइटिस’ कहते हैं। इसमें गले प्रदेश की ‘लिंफ ग्लैंड’ में इन्फलेगे रस (शोथ) हो जाता है। सर्दी-जुकाम, टॉन्सिल का संक्रमण, साइनस की तकलीफ, खांसी, टीबी, एचआईवी, वैंâसर आदि कई कारण हैं। अत: उनको जानना आवश्यक है। छोटी बीमारी से बड़ी बीमारी तक, किसी भी अवस्था में यह गांठ होती है। भारत में टीबी का संक्रमण व टॉन्सिल का संक्रमण बहुतांश में पाया जाता है परंतु उचित निदान व चिकित्सा के लिए प्रयोगशालीय परीक्षण व शारीरिक परीक्षण आवश्यक है।
प्राथमिक जांच के रूप में सीबीसी व ईएसआर रक्त परीक्षण, ट्यूबरकुलीन टेस्ट (एम.टी), चेस्ट एक्स-रे, गांठ की एफएनएसी करवानी चाहिए, जिससे चिकित्सा करना आसान हो जाता है। रिपोर्ट अपने डॉक्टर को दिखाएं या मुझे पुन: संपर्क करें।
इस दरम्यान प्राथमिक चिकित्सा स्वरूप आप कांचनार गुगुलु की २-२ गोली, लघुमालिनी बसंत की २-२ गोली २ बार गरम पानी के साथ लें। निदान पक्का हो जाने पर रोगानुसार दवा दी जाएगी परंतु इन गांठों को अनदेखा न करें।
मेरे होठ हमेशा सूखे रहते हैं। गर्मी, सर्दी, बरसात कोई भी मौसम हो, होठ फटते रहते हैं व मुंह अंदर से सूखा हो जाता है। होठ फटने पर कई बार हल्की-सी ब्लीडिंग भी हो जाती है। मलहम लगाया परंतु कोई फायदा नहीं होता है। घरेलू उपचार या दवा बताएं?
-छाया- धारावी
होठों व मुंह सूखने के कई कारण हो सकते हैं परंतु प्रमुख कारणों में लोकल इंफेक्शन, मुंह का पकना / आना, शरीर में रक्त की कमी, मधुमेह, एजर्ली, टूथ पेस्ट / मंजन, दांत का डेंवर (बतीशी), ज्यादा ठंडी, वात के रोग, दांतों के रोग व अन्य कई कारण। अत: कारणों को जानकर चिकित्सा करना ही श्रेयस्कर होता है। कुछ प्राथमिक प्रयोग शालीय परीक्षण जैसे कि सीबीसी, थाइराइड टेस्ट, ब्लड शुगर टेस्ट इत्यादि करना चाहिए।
प्राथमिक चिकित्सा की दृष्टिकोण से शुद्ध गाय का घी या शतघौतघृत होठों पर दिन में २ से ३ बार लगाएं। दूध की मलाई भी लगाई जा सकती है। इसके कारण होठों पर स्निगधता बनी रहती है।
नींबू पानी, नारियल पानी, शरबत आदि का सेवन करें। पीने के पानी की मात्रा बढ़ा दें। फलों व साग-सब्जी की मात्रा खाने में बढ़ा दें। तीखा-मिर्ची मसाला आदि खाने में कम करें। यह सब नियमित करते रहेंगे तो आराम मिलेगा। यदि संतोषजनक परिणाम लगे तो फिर कारणों को जानने के लिए अपने पैâमिली डॉक्टर को मिलकर परीक्षण करवाएं।
२ वर्ष पहले मुझे पीलिया हुआ था। देशी दवा व झाड़-फूंक भी किया। पीलिया ठीक हो गया परंतु उसके बाद से मेरा पाचन कमजोर हो गया। लीवर भी कमजोर हो गया। खून की रिर्पोट सही आई है परंतु सोनोग्राफी में ‘फैटी लीवर’ बताया है। डॉक्टर जी मुझे लीवर मजबूत करने व पाचनशक्ति सुधारने की औषधि बताएं? डॉक्टर साहब मेरी उम्र ५१ वर्ष की है। मजदूरी का काम करता हूं।
-तीर्थ बहादुर वर्मा- भिवंडी
आपका पाचन ठीक नहीं है व लीवर कमजोर है, ऐसा आपको लगता है। आयुर्वेद की बहुत सारी दवाएं ‘लीवर’ तथा पाचनतंत्र को मजबूत व ठीक करने में उपयोगी हैं। जैसे कुटकी, पुर्ननवा, कालमेध, भूई आंवला, भृंगराज, आवला गुडुची, नीम, त्रिफला इत्यादि परंतु लीवर की रामबाण दवा है ‘आरोग्यवर्धनी’ जो कि सर्वगुण संपन्न बहुपयोगी दवा है। आप २-२ गोली दिन में २ बार लें। इसी के साथ पुर्ननवाष्टक क्वाथ ४-४ चम्मच २ बार लें तो बेहतर होगा। आपको पीलिया हुआ था साथ ही साथ पैâटी लीवर है तो आप को अपने रहन-सहन व खान-पान पर विशेष ध्यान रखना होगा। आप डीप प्रâाइड, शराब, अत्याधिक दवाएं विशेषत: पेन कीलर आदि का सेवन कम करें। एलोपैथी बहुत सारी दवाएं लीवर पर अपना विषाक्त प्रभाव दिखाती हैं।