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योगीराज में दंगाइयों से नरमी असंभव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए कथित उपद्रवियों के पोस्टरों को हटाने का आदेश दिया है। इस पोस्टर में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल रहे लोगों को कथित तोड़फोड़ और उपद्रव का आरोपी मानते हुए उनके फोटो और पते प्रकाशित किए हैं। योगी सरकार ने इन्हें हर्जाना भरने को कहा है।

हालांकि हाई कोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने कहा कि योगीराज में दंगाइयों से नरमी असंभव है। मृत्युंजय कुमार ने एक ट्वीट कर कहा, ‘दंगाइयों के पोस्टर हटाने के हाइकोर्ट के आदेश को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की जरूरत है। सिर्फ उनके पोस्टर हटेंगे, उनके खिलाफ लगी धाराएं नहीं। दंगाइयों की पहचान उजागर करने की लड़ाई हम आगे तक लड़ेंगे। योगीराज में दंगाइयों से ‘नरमी’ असंभव।’

दंगाइयों के पोस्टर हटाने के हाइकोर्ट के आदेश को सही परिपेक्ष्य में समझने की ज़रूरत है। सिर्फ उनके पोस्टर हटेंगे, उनके खिलाफ लगी धाराएं नही।

बता दें कि सोमवार को चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि बिना कानूनी उपबंध के नुकसान वसूली के लिए पोस्टर में फोटो लगाना अवैध है। यह निजता के अधिकार का हनन है। बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए किसी की फोटो सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित करना गलत है।’ इसके साथ ही अदालत ने सरकार को १६ मार्च को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने उपद्रव और तोड़फोड़ करने के आरोपियों के सार्वजनिक पोस्टर लगाए जाने के मामले में लखनऊ के डीएम और कमिश्नर को तुरंत पोस्टर, बैनर और फोटो हटाने के आदेश दिए हैं।