योग तक पहुंचा ‘मोबाइल भोग’

देश में डिजिटल आंधी चल रही है। स्मार्ट फोन, टैब, लैपटॉप आदि का जमाना है। मनोरंजन, काम में सहायता करने और समय बचाने के लिए बनाए गए उक्त गैजेट के लोग अब इतने आदी हो चुके हैं कि यदि उन्हें उक्त चीजें न मिलें तो बौखला उठते हैं। खासकर मोबाइल में पब्जी जैसे गेम और नेटफ्लिक्स, ऑमेजन आदि पर वेब सीरीज देखने में युवा पीढ़ी अपना रोजमर्रा का इतना कीमती समय गंवा दे रही है। नतीजतन लोगों को अंत में इन आदतों को छुड़ाने के लिए डॉक्टरों के पास जाना पड़ रहा है। फोन रोग एक ऐसा रोग हो गया है, जिसे ठीक करना डॉक्टरों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि यह व्यक्ति की इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है कि उसे फोन से दूर रहना है। ऐसे में मोबाइल का भोग करनेवाले युवा और उनके अभिभावक इसका इलाज ढूंढ़ते -ढूंढ़ते योग तक पहुंच गए हैं। मुंबई स्थित शतक पुराने ‘द योगा इंस्टीट्यूट’ ने लोगों के ऑनस्क्रीन समय बिताने पर अध्ययन कर लोगों के इस नशा बन चुकी आदत को छुड़ाने का इलाज ढूंढ़ लिया है। सकारात्मक परिणाम देख लोगों को ऑनस्क्रीन के नशे से मुक्त करने के लिए ६ महीने का कोर्स बनाया जा रहा है।
मोबाइल का आविष्कार दूरियों को मिटाने और संवाद साधने के लिए किया गया था लेकिन यही मोबाइल अब लोगों के स्वास्थ्य, व्यवहार, बर्ताव और मानसिक परेशानियों का कारण बनता जा रहा है। जिस तरह से लोगों में सिगरेट, दारू आदि का नशा होता है, वैसे ही आज के बच्चों, युवाओं और वयस्कों में मोबाइल, लैपटॉप आदि मनोरंजन के गैजेट का नशा सवार है। ‘द योगा इंस्टीट्यूट’ के सहायक निदेशक हृषी योगेंद्र ने बताया कि ‘बिंज वॉचिंग’ यानी रोजाना लगातर २ से ६ घंटों तक मोबाइल, लैपटॉप व टीवी आदि देखना किसी नशे से कम नहीं है। हमने हमारे ही इंस्टीट्यूट में आनेवाले लोगों पर अध्ययन किया जिसमें से कई लोगों को खुद नहीं पता चला कि वे घंटों तक गैजेट में समय बिताने के आदी हो गए हैं। घंटों तक फोन में घुसे रहने से शरीर और दिमाग दोनों को ही काफी क्षति पहुंचती है। लोग एक दूसरे से संवाद करना ही छोड़ देते हैं और समाज से कट जाते हैं। अभिभावक अपने बच्चों को लेकर इस आस से पहुंच रहे हैं कि शायद योग से उनके बेटे की लत छूट जाए। १४ वर्ष से ५५ के उम्र के कुल ४० लोगों पर अध्ययन किया गया। उनके बर्ताव, मानसिक परिस्थिति को काउंसलर ने जाना। इसके बाद हमने २० लोगों को चुना और उनके ऑनस्क्रीन रहने के नशा को छुड़ाने और शारीरिक व मानसिक रूप से प्रबल बनाने के लिए आसान, प्राणायाम और क्रियाएं करवार्इं। साथ ही उनकी काउंसलिंग भी की। अब उनमें सुधार देखने को मिल रहा है। मार्च से हम ६ महीने का ऐसा योग कोर्स शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें घंटों ऑनस्क्रीन बिताने की बुरी आदत को छुड़ाने और योग की आदत लगाने की लिए कार्य करेंगे।