" /> रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका

रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई याचिका

पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को लेकर जब से राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा सदस्य के मनोनयन की घोषणा सार्वजनिक हुई है तभी से उनके निर्णय का पुरजोर विरोध हो गया है। गोगोई को राष्ट्रपति ने राज्यसभा सदस्य के रूप में नियुक्ति की है। विरोध अब अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। उनके मनोनित के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में याचिका भी दायर हुई है। याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति से अपील की गई है कि उनके शपथ ग्रहण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। याचिका सामाजिक कार्यकर्ता मधु किश्वर द्वारा डाली गई है। उन्होंने तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के बाद राज्यसभा के सदस्य बनें, यह नैतिक तौर पर सही नहीं है। यह स्वतंत्र न्यायपालिका के अवधारणा पर गहरा कुठाराघात जैसा है। मधु किश्वर ने बताया कि अगर न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के बाद इस तरह के पदों पर आसीन होते हैं तो सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसले निष्पक्ष नहीं थे। किश्वर ने कहा अगर ऐसा है तो ये बात अपने आप में सिद्ध होती है कि उनके द्वारा लिए सभी फैसलों से सरकार को उपकृत करने के प्रयास किया गया था। राम मंदिर पर निर्णय लेना हो, या तीन तलाक पर कानून बनाना सभी केंद्र सरकार के इशारे पर लिए गए थे। उन्होंने कहा गोगोई की नियुक्ति के बाद ऐसे कई ज्वलंत प्रश्न जरूर खड़े होते हैं। यह भी चिरस्मरणीय है,जब सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायधीश स्वतंत्र भारत में प्रथम प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और इसमें राज्यसभा जाने वाले न्यायमूर्ति भी शामिल थे, तो देश के लोगों का न्यायतंत्र से विश्वास निश्चित रूप से कम होगा।