" /> रक्त और पुष्प

रक्त और पुष्प

पूरा देश कोरोना के साथ युद्ध लड़ रहा है और यह कहना संभव नहीं है कि यह युद्ध कब तक चलेगा। इस दौरान युद्ध के मैदान में क्या चल रहा है? उसकी अनदेखी कर दी गई। इस अनदेखी का नतीजा शनिवार को सामने आया। कश्मीर की सीमा पर आतंकवादी अत्याचार और हमले बढ़ गए हैं। शनिवार रात उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा इलाके में एक झड़प हुई, जिसमें हिंदुस्थान को बड़ा नुकसान हुआ है। कर्नल आशुतोष शर्मा सहित पांच जवान शहीद हो गए हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी ने भावनात्मक बयान दिया कि देश में डॉक्टर्स, नर्सेस और पुलिसकर्मी कोरोना योद्धा हैं। इन कोरोना योद्धाओं पर पुष्पवृष्टि करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सेना के तीनों दलों को जमीन और आकाश में उतार दिया। कोरोना संकट के दौरान दिन-रात काम कर रहे कोरोना योद्धाओं की हौसलाअफजाई के लिए हमारे लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टरों ने आसमान से इन ‘कोरोना योद्धाओं’ पर पुष्पवर्षा की। कुछ जगहों पर सेना के बैंड ने भी मानवंदना दी। थलसेना और नौसेना ने भी इस सलामी समारोह में हिस्सा लिया। ये भी एक अलग तरह का समारोह आयोजित किया गया, लेकिन उसी समय कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों के साथ झड़प शुरू थी। उस समय कर्नल आशुतोष शर्मा और उनके चार साथी देश की रक्षा में जान की बाजी लगाकर लड़ रहे थे। इस लड़ाई में ये पांचों वीर शहीद हो गए। प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीद हुए इन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर अपना कर्तव्य निभा दिया है। सभी पांच वीरों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है और उनमें से एक वीर का नाम सब इंस्पेक्टर एस.ए. काजी है। फिलहाल जो लोग देश में हिंदू और मुस्लिम का राजनीतिक खेल खेल रहे हैं, उन्हें कर्नल शर्मा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर पाकिस्तानियों से लड़ते शहीद हुए काजी के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। हम कोरोना से ‘युद्ध’ में कश्मीर युद्ध को भूल गए हैं, लेकिन पाकिस्तानी खुराफात अभी भी जारी है। घुसपैठ और हमारे जवानों पर हमले जारी हैं। कश्मीर में सैनिकों पर हमले हो रहे हैं। उसी प्रकार देशभर में पुलिकर्मियों पर भी हमले हो रहे हैं लेकिन कोराना के मामले में, पिछले एक महीने में केवल महाराष्ट्र में ही पुलिसकर्मियों पर १७३ हमले हुए हैं। लेकिन कश्मीर में पाकियों के हमले अलग हैं। कश्मीर में अनुच्छेद-३७० को हटाने के बाद से ‘लॉकडाउन’ शुरू ही था। लोगों की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाकर शांति स्थापित करने का प्रयास किया गया लेकिन इस शांति में भूगर्भीय हलचल महसूस की जा रही है। ‘लॉकडाउन’ के दौरान कश्मीर में घुसपैठियों ने हमला किया ही। शनिवार की रात हुए ऐसे ही एक हमले में कर्नल शर्मा की शहादत इसका प्रमाण है। कर्नल शर्मा का बलिदान कोई छोटी बात नहीं है। शर्मा २१ राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर थे। उनके साथ पांच बटालियन के मेजर अनुज सूद, नायक राजेश और लांसनायक दिनेश भी शहीद हुए हैं। आतंकवादियों से मुठभेड़ में हिंदुस्थानी सेना ने ५ साल बाद दूसरी बार किसी कमांडिंग ऑफिसर की जान गंवाई है। २०१५ में, कुपवाड़ा के हाजिनाका जंगल में ४१ राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष महाडिक शहीद हुए थे। कर्नल महाडिक महाराष्ट्र के सुपुत्र थे। आतंकवादी अभी भी कश्मीर के जंगलों में छिपे हुए हैं और उनके इरादे नेक नहीं हैं। इसमें हमारी सेना का नुकसान हो रहा है। कर्नल शर्मा एक साहसी अधिकारी थे। वह केवल ४५ साल के थे। उन्हें अब तक दो बार ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी बटालियन के साथ दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के दौरान वे हमेशा आगे रहते थे। बेटी तमन्ना के साथ कर्नल शर्मा की एक तस्वीर जारी की गई है। वह भावुक करनेवाली है। तमन्ना का जन्मदिन १ मई को था और ३ मई को उसके प्रिय पिता देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। इन शहीदों के परिजनों पर भी कोई पुष्पवर्षा कर दे! उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भी बैंड वादन करो और दीये-मोमबत्तियां जलाओ। बिना किसी गाजे-बाजे के इन पांच सैनिकों की शहादत का बदला लेने के लिए भी सर्जिकल स्ट्राइक हो जाने दो। यह अच्छा संकेत नहीं है कि हमारे पांच बहादुर सैनिक एक ही समय में शहीद हो जाएं। हमारे सैनिक हमारी ही धरती पर जान गंवा रहे हैं। दिल्ली में एक मजबूत और प्रखर राष्ट्रवादी देशभक्त आदि सरकार के रहते हुए ऐसा हो रहा है। कोरोना के साथ युद्ध और उसके योद्धाओं का सम्मान जारी रहेगा, लेकिन कश्मीर की अनदेखी करना ठीक नहीं होगा। अनुच्छेद-३७० हटाने और कश्मीर के टुकड़े करने पर तालियां बजीं। यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के मजबूत इरादों के कारण ही ये हो सका। लेकिन हमारे जवानों का बलिदान नहीं रुका और सेना का सामूहिक नरसंहार जारी रहा। कश्मीर में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देकर और आंसू बहाकर क्या होगा? हंदवाड़ा सैन्य अड्डे पर कर्नल शर्मा सहित पांच बहादुर सैनिकों की लाशें तिरंगे में लपेटकर रखी गई हैं। यह हर देशवासी के लिए दर्द देनेवाली तस्वीर है। यह एक ऐसा दृश्य है जहां ‘जय हिंद’ का नारा गले में ही घुट जा रहा है। जहां एक ओर भारतीय सेना कोरोना योद्धाओं पर आसमान से पुष्पवृष्टि कर रही है, उसी समय कश्मीर की भूमि कर्नल शर्मा सहित पांच वीर सैनिकों के खून से लथपथ हो गई। यह तस्वीर अच्छी नहीं है, हम बस इतना ही कह सकते हैं!