रक्षाबंधन पर अद्भुत संयोग

हर साल सावन मास की पूर्णिमा का इंतजार हर बहन को रहता है। क्योंकि इस बहने अपने भाईयों के हाथो में रक्षासूत्र बांध कर उसकी लंबी उम्र और सुख की कामना ईश्वर से करती हैं और अपनी रक्षा का वचन लेती है। रक्षाबंधन का पर्व देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस यानी कि १५ अगस्त को रक्षाबंधन का ये पावन त्योहार मनाया जायेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस  साल बाद यह शुभ संयोग एक साथ आया है। साल राखी का त्योहार गुरुवार के दिन पड़ने से इसका महत्व भी काफी बढ़ गया है। दरअसल गुरुवार का दिन गुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। इस रक्षाबंधन पर कई शुभ योग और संयोग बननेवाले हैं। सबसे पहले रक्षा बंधन के ४ दिन पहले ही गुरु वृश्चिक राशि में मार्गी होकर सीधी चाल चलने लगेंगे, जो कि राखी की दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा इस बार रक्षाबंधन पर नक्षत्र श्रवण, सौभाग्‍य योग, बव करण, सूर्य राशि कर्क और चंद्रमा मकर में रहने वाले हैं। ये सभी शुभ संयोग मिलकर इस बार रक्षाबंधन को बेहद खास बनाने वाले हैं।
दरअसल पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक बार देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया था। इस युद्ध में देवताओं के राजा इंद्र ने भी भाग लिया था, जिसकी वजह से राजा इंद्र की पत्नी इंद्राणी श्रावण पूर्णिमा के दिन देवताओं की रक्षा की लिए गुरु बृहस्पति के पास गर्इं, जिस पर देवताओं की विजय के लिए गुरु ने उन्हें रक्षाबंधन बांधने का सुझाव दिया था। परिणाम स्वरूप राजा इंद्र को विजय प्राप्त हुई। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का काला साया भी नहीं होगा और कई शुभ संयोग भी बनेंगे। ऐसा ही एक संजोग २००० में भी बना था। रक्षा बंधन के ४ दिन पहले देव गुरु बृहस्पति मार्गी हो रहे हैं।
मान्यता के अनुसार जब भी भद्रा का समय होता है तो उस दौरान रक्षासूत्र नहीं बांधा जा सकता है। भद्राकाल के समय राखी बांधना अशुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। जिस तरह से शनि का स्वभाव क्रूर और क्रोधी है उसी प्रकार से भद्रा का भी है। उनके उग्र स्वभाव के कारण ब्रह्माजी ने इन्हें पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। पंचाग में इनका नाम विष्टी करण रखा गया है। किसी विशेष दिन पर भद्रा लगने से शुभ कार्यों को करना निषेध माना जाता है। कहानियों के अनुसार रावण की बहन ने भद्राकाल में ही अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधा था, जिसके कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था। इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल नहीं रहेगा। इसलिये बहनें भाइयों की कलाई पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच किसी भी समय पर राखी बांध सकती हैं।
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
रक्षा बंधन तिथि – १५ अगस्त २०१९, गुरुवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ- १४ अगस्त -१५:४५
पूर्णिमा तिथि समाप्त- १५ अगस्त- १७:५८
भद्रा समाप्त- सूर्योदय से पहले
तिथि १५ अगस्त २०१९
रक्षा बंधन अनुष्ठान का समय- सुबह ५ बजकर ५३ मिनट से शाम ५ बजकर ५८ मिनट