रण, योद्धा और रणछोड़दास

भगवा खेमे के लिए सबसे मुश्किल मानी जानेवाली फूलपुर संसदीय सीट २०१४ में आजादी के बाद पहली बार केशव प्रसाद मौर्य ने जीती थी। अब योगी सरकार में उप मुख्यमंत्री और भाजपा के पिछड़ा चेहरा कहे जानेवाले मौर्य ने कुशल व्यूह रचना कर फिर एक बार इस सीट को आसान कर दिया। हालांकि फूलपुर जैसी परिस्थितियां भाजपा का किला कहे जानेवाले गोरखपुर संसदीय सीट पर नही है, जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद आते हैं। गोरखपुर संसदीय सीट भाजपा ने उपचुनाव में गंवाई थी और एक बार फिर वहां उसे संघर्ष करना पड़ रहा है। गोरक्षनाथ पीठ की पुश्तैनी सीट कहे जानेवाले गोरखपुर में योगी अपना किला बचाने की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं। गोरखपुर में भाजपा प्रत्याशी के रूप में उतारे गए भोजपुरी स्टार रविकिशन का जादू नहीं चल रहा है तो बाहरी प्रत्याशी के नाम पर ब्राह्मण से लेकर योगी के सजातीय ठाकुर तक नाराज हैं। उत्तर प्रदेश में सातवें और आखिरी चरण में जिन लोकसभा सीटों पर १९ मई को मतदान होना है, उनमें योगी का अपना किला गोरखपुर शामिल है। एक उपचुनाव हार जाने के बाद योगी का यह किला उतना महफूज नहीं माना जा रहा है। ऊपर से भाजपा प्रत्याशी को लेकर असंतोष ने और भी परेशानी पैदा कर दी है। इस हफ्ते योगी गोरखपुर और आस-पास के इलाके में ही १९ जनसभाओं को संबोधित करेंगे जबकि कार्यकर्ताओं के साथ एक दर्जन बैठकें करेंगे।

फूलपुर में केशव की रणनीति
आजादी के बाद से कभी फूलपुर संसदीय सीट न जीतनेवाली भाजपा के लिए बीते लोकसभा चुनावों में केशव प्रसाद मौर्य की जीत मोदी लहर का परिणाम मानी गई थी। बाद में उपचुनाव में इस सीट को गंवा देने के बाद इस आकलन को और मजबूती ही मिली थी। इस बार के चुनाव में केशव प्रसाद मौर्य ने फूलपुर में यहां की कद्दावर कुर्मी नेता केशरी पटेल को प्रत्याशी बना भाजपा की राह आसान कर दी। सघन प्रचार, कमजोर कांग्रेस प्रत्याशी और सपा के यादव प्रत्याशी के चलते केशव प्रसाद मौर्य ने फूलपुर में एक बार भाजपा की राह के रोड़े हटा दिए और यह मुश्किल सीट आसान लगने लगी।

योगी ने संभाली कमान
करीब एक साल पहले गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनावों में मिली हार के बाद अब योगी का खास ध्यान अपनी सीट पर है। पिछले साल हुए उपचुनावों में भाजपा प्रत्याशी उपेंद्र शुक्ला को इस सीट पर सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद के हाथों मात मिली थी। बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद इस सीट को खाली किया था और यहां से उनकी व गोरक्षनाथ मठ की प्रतिष्ठा जुड़ी थी। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस सीट पर योगी के पसंद के उम्मीदवार भोजपुरी स्टार रविकिशन शुक्ला को खड़ा किया है।

हिंदू युवा वाहिनी की चुनौती
गोरखपुर में योगी के लिए एक और चुनौती खुद उनके बनाए संगठन हिंदू युवा वाहिनी के लोग भी हैं। कभी भाजपा के समानांतर योगी ने वाहिनी का गठन किया था। योगी के खास और हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व में अध्यक्ष रहे सुनील सिंह अब बागी हो चुके हैं और गोरखपुर में अपने समर्थकों के साथ भाजपा के खिलाफ गठबंधन प्रत्याशी का प्रचार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने वाहिनी को भंग कर दिया था और सभी पदाधिकारियों को हटा दिया था। सुनील सिंह ने खुद भी गोरखपुर से नामांकन दाखिल किया था। तकनीकी कारणों से उनका नामांकन रद्द हो गया है और अब वो मुख्यमंत्री योगी को इसका दोषी बताते घूम रहे हैं।

निषाद वोटों के लिए…
गोरखपुर में भाजपा की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बड़ी तादाद में यहां केवट बिरादरी के वोटों की मौजूदगी है। गठबंधन ने इस बिरादरी के मजबूत प्रत्याशी रामभुवाल निषाद को खड़ा किया है जो मुस्लिम, दलित और यादव वोटों के साथ कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। बीते साल हुए उपचुनावों में भाजपा को हरानेवाले प्रवीण निषाद को पार्टी में शामिल कर योगी ने गोरखपुर की पड़ोस की सीट संतकबीरनगर से टिकट दिया है।

पूर्वांचल की १३ सीटों पर लड़ाई
अंतिम चरण में गोरखपुर मंडल के तहत आनेवाली सभी छह लोकसभा सीटों पर मतदान होगा। ये सीटें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाववाली जानी जाती हैं। पिछले लोकसभा चुनावों में इन सभी सीटों पर भाजपा ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी। सातवें चरण में १९ मई को गोरखपुर मंडल में गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर, सलेमपुर, बांसगांव और देवरिया सीटों पर मतदान होना है। इसके अलावा इसी दिन वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, मिर्जापुर, बलिया और घोसी सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे।

मैदान छोड़ दिया
तमाम चर्चाओं के बाद भी प्रियंका गांधी बनारस में मोदी के खिलाफ चुनाव मैदान में नहीं उतरीं। कांग्रेस ने एक बार फिर से अपने पुराने घोड़े अजय राय पर ही दांव लगाया है। अब मोदी के सामने कड़ी चुनौती न पेश करने को लेकर फजीहत झेल रही कांग्रेस के सामने अपना सम्मान बचाना अहम है। पिछले चुनाव में मोदी के सामने खड़े अजय राय की जमानत जब्त हुई है। अब जबकि सपा प्रमुख की पहली पसंद के प्रत्याशी तेज बहादुर यादव का नामांकन रद्द हो चुका है तो कांग्रेस को कम से कम कुछ आस बंधती दिख रही है।

अमेठी की लड़ाई
स्मृति इरानी के साथ मुश्किल मुकाबले में अमेठी में फंसे राहुल गांधी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने वहां १०० के करीब बाहरी कार्यकर्त्ताओं की एक फौज उतारी थी। इस टीम में ज्यादातर पूर्व में वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े नौजवान और सामाजिक कार्यकर्ता रहे लोग शामिल थे। अमेठी में इस टीम ने छोटी-छोटी टुकड़ियों में बंट कर स्थानीय नेताओं को साथ लेकर गांवों में सघन प्रचार किया। इन उत्साही नौजवानों की टीम ने अमेठी में १० दिन से ज्यादा रुक कर ५०० से ज्यादा गांवों को मथा और राहुल के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया। अमेठी में ६ मई को मतदान होने के बाद अब यही टीम प्रियंका गांधी के निर्देश पर बनारस के लिए रवाना कर दी गई है।

मोदी और प्रियंका
अजय राय के प्रचार में प्रियंका बनारस आ रही हैं। बनारस में प्रियंका का लंबा रोड शो होगा। इस रोड शो को यादगार बनाने की तैयारी हो रही है। प्रियंका गांधी १५ मई को बीएचयू गेट पर लंका स्थित महामना मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर अपना रोड शो शुरू करेंगी। वहां से प्रियंका रविदास गेट, अस्सी, शिवाला, सोनारपुरा, मदनपुरा, गोदौलिया, बांसफाटक होते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर तक जाएंगी। प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस के और भी कई बड़े नेता बनारस में सभाएं करेंगे। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजबब्बर, प्रमोद तिवारी, अजय सिंह लल्लू, राजीव शुक्ला, हरीश रावत और कई अन्य नेता बनारस में छोटी-छोटी सभाओं को संबोधित करेंगे। उधर बनारस के रण को आसान जानते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी कोई कसर नही छोड़ना चाहते हैं। पिछले चुनाव की ही तर्ज पर मोदी न केवल बनारस में डेरा डालने आ रहे हैं बल्कि ताबड़तोड़ रैलियों का भी उनका कार्यक्रम है। मोदी के साथ ही लगातार बनारस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम हो रहे हैं। खुद भाजपा नेताओं का मानना है कि बनारस के पड़ोस में गाजीपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली और घोसी जैसी सीटों पर सपा-बसपा गठबंधन के चलते खासी मुश्किलें खड़ी हुई हैं। बनारस में मोदी के अधिक समय देने से इन सीटों पर भी भाजपा की राह आसान हो सकती है। कुल मिलाकर बनारस के लोगों का कहना है कि मोदी की जीत तो पक्की है पर कांग्रेस या अन्य विपक्षी दल आसानी से मैदान नही छोड़ेंगे।