रमजान में कब्रें हाउस फुल!

देश की बढ़ती जनसंख्या का असर मुंबई पर भी पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि सड़क से लेकर रेलवे तक लोगों से खचाखच भरी हुई दिखती है। दूसरी ओर मुंबई की विस्फोट जनसंख्या के कारण कब्रिस्तान का हाल भी बेहाल हो चुका है। जनसंख्या बढ़ोत्तरी के साथ मृत्युदर का अनुपात भी बढ़ा है। ऐसे में कब्रगाह में दफनाने के लिए कब्रेंं भी कम पड़ने लगी हैं। ऐन रमजान के महीने में पूर्वी उपनगर के गोवंडी की एक कब्रिस्तान पूरी तरह से हाउस फुल हो गई हैं। कब्रिस्तान के हाउस फुल होने से वहां के मुसलमानों के सामने अब शव को दफनाने की समस्या आन पड़ी है।
बता दें कि पूर्वी उपनगर का गोवंडी इलाका धारावी के बाद सबसे बड़ा झोपड़पट्टी इलाका माना जाता है। मुस्लिम बाहुल्य इलाके के रूप में चर्चित गोवंडी शिवाजीनगर, बैगनवाड़ी की आबादी करीब तीन लाख के करीब है। इस इलाके में एकमात्र देवनार कब्रिस्तान था। तत्कालीन शिवसेना नगरसेवक सुरेश कृष्ण उर्फ बुलेट पाटील के प्रयासों के कारण रफीनगर इलाके में मुसलमानों को एक और कब्रिस्तान मिल पाया। रफीनगर का यह कब्रिस्तान बीते वर्ष शुरू हुआ था, जो कुछ ही महीनों में फुल हो गया। बाद में यहां गार्डन की जगह शवों को दफनाया जाने लगा लेकिन अब वह जगह भी पूरी तरह से भर गई है। बुधवार से ही यहां शव को दफनाने पर रोक लगा दी गई है। देवनार कब्रिस्तान एक वर्ष पहले ही कब्र के अभाव के कारण बंद पड़ा हुआ है। ऐसे में रमजान के महीने में रफीनगर कब्रिस्तान हाउस फुल होने से लोगों में आक्रोश पैâला हुआ है। शवों को दफनाने के लिए अब तीन किलोमीटर दूर ट्रांबे जाना पड़ेगा। स्थानीय विधायक अबू हाशिम आजमी इस समस्या का निदान करने की बजाय तीन किलोमीटर जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की बांग दे रहे हैं। कल कांग्रेस नगरसेवक विट्ठल लोकरे ने कब्रिस्तान के हाउस फुल को लेकर मनपा एम-पूर्व वॉर्ड के सहायक मनपा आयुक्त श्रीनिवास किलजे से मुलाकात की। किलजे के साथ देवनार कब्रिस्तान का भी उन्होंने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान किलजे ने बंद पड़े देवनार कब्रिस्तान को तुरंत शुरू करने का आश्वासन दिया।
कब्रिस्तान में जगह नहीं
५ लाख की आबादी में २ कब्रिस्तान