राजस्थान विधानसभा में फिर उड़ी भूत की खबर

राजस्थान विधानसभा के भूतिया होने की कहानियां एक बार फिर सामने आने लगी हैं। गुरुवार को रामगढ़ से बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के बाद वहां चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं। इससे एक बार फिर २०० की जगह केवल १९९ विधायक विधानसभा में होंगे। खास बात यह है कि २००२ के बाद से यह जैसे एक ट्रेंड बन गया है। १३वीं विधानसभा को छोड़कर हर बार किसी न किसी कारण से २०० के पूरे आंकड़े को बरकरार नहीं रखा जा सका है।
दरअसल, ५ जून २००२ को अजमेर (पश्चिम) से विधायक किशन मोटवानी की मौत के बाद उपचुनाव हुए थे। १४वीं विधानसभा में बजट सत्र के दौरान चीफ विप कालूलाल गुज्जर और भाजपा विधायक हबीबुरहमान ने विधानसभा में पूजा कराने की मांग की थी। बता दें कि नई इमारत में विधानसभा २००२ में शिफ्ट हुई थी। भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी और कल्याण की अकाल मौत के बाद यह बातें होने लगीं कि राजस्थान विधानसभा भूतिया है। यहां तक कि कुछ लोगों का मानना है कि इमारत कब्रिस्तान पर बनी है। १२वीं विधानसभा में २५ मई, २००४ को भाजपा के भंवर सिंह के इस्तीफे से कुल संख्या १९९ रह गई। उसके बाद उपचुनाव से ही संख्या पूरी होकर २०० पहुंची लेकिन २२ अक्टूबर, २००४ लूनी से कांग्रेस विधायक राम सिंह बिश्नोई की मौत के बाद एक बार फिर यह १९९ पर पहुंच गई। उसके बाद २८ जनवरी, २००५ को लूनी से जोगाराम पटेल चुन लिए गए। १३वीं विधानसभा में ऐसा कुछ नहीं हुआ लेकिन १४वीं विधानसभा में कीर्ति कुमारी की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई और इसी साल फरवरी में भाजपा विधायक कल्याण सिंह की वैंâसर से मौत हो गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक पंडित गणेश महाराज को व्समाधान निकालने के लिए बुलाया था।