राज्यसभा चुनाव से बनेगा २०१९ का रोडमैप!

जब से भाजपा की ओर से एक सीट गठबंधन को देने की चर्चा छिड़ी तब से राज्यसभा की दसवीं सीट को लेकर माथा-पच्ची बढ़ गई है। पिछले बार की तरह यदि इस बार भी क्रॉस वोटिंग हो गई तो दसवीं सीट का परिणाम दूसरी वरीयता के मतों पर निर्भर हो जाएगा। पिछली बार भाजपा से समर्थन से लड़ी उद्योगपति प्रीति महापात्र को अपना दल की ओर से भाजपा रणनीतिकार प्रत्यासी बना कर उतारने की तैयारी में हैं। समाजवादी पार्टी ने दसवीं सीट बहुजन समाज पार्टी को दिया है, जब से सपा-बसपा गठबंधन की चर्चा शुरू तो मायावती को लड़ाने की तैयारी थी। जीत की स्थिति स्पष्ट नहीं होती देख मायवती खेमें से मायावती के भाई आनंद का नाम चलाया गया। वोट की बिगड़ती देख मायावती ने अपना टूटता वोट बैंक बचाने के लिए दलित वैâडर भीमराव अंबेडकर को प्रत्यासी घोषित करके अपना वूâटनीतिक पैâसला लिया। यदि भीमराव हार गए तो माया का दरकता दलित वोट बैंक मायावती के साथ सहानभूति के साथ २०१९ तक खड़ा हो जाएगा। यूपी की अन्य छोटी-छोटी जातियों में जातिवार बहुत हद तक नेता तैयार हो गए हैं इसलिए सपा-बसपा आंशिक गठजोड़ से धरातल पर वोटों का वह फ्लो नहीं बन पा रही है। इसका असली परीक्षण प्रदेश में दो लोकसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनाव के परिणाम के बाद सामने आएगा। आगे यूपी में उसी समीकरण के इर्द-गिर्द लोकसभा २०१९ का लोकसभा चुनाव घूमता दिख सकता है।