राज्य का पहला उर्दू स्कूल जहां टैब से होती है पढ़ाई

विद्यार्थियों को बेहतर से बेहतर शिक्षा मिले, इस उद्देश्य से कुछ युवा शिक्षक हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। ऐसे ही एक उर्दू शिक्षक हैं अफरोज बागवान जिन्होंने   लोगों से पैसे एकत्र कर अपने स्कूल के बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने की शुरुआत की है। राज्य का यह पहला उर्दू स्कूल है, जिसमें बच्चे टैब से पढ़ाई करते हैं।
सोलापुर स्थित एमएनपी बॉयज उर्दू स्कूल में आज से दो वर्ष पहले महज १५ विद्यार्थी होने की बात अफरोज ने कही। लोग बच्चों को स्कूल भेजने में जरा भी रुचि नहीं दिखाते थे, जिसके बाद मैंने अंग्रेजी व दूसरे विषय भी पढ़ाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी। इसके बाद मैंने देखा कि आज के इस आधुनिक दौर में कई स्कूलों द्वारा प्रोजेक्टर, इंटरनेट, लैपटाप व टैब के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है क्यों न हमारे स्कूल के विद्यार्थियों को भी उक्त माध्यम की मदद से पढ़ाया जाए। मैंने अपने वेतन से कुछ पैसे इकट्ठा किए और अपनी मंशा विद्यार्थियों व आसपास के लोगों को बताई, जिसके बाद लोगों ने लगभग २ लाख रुपए इकट्ठा किए। उन पैसों से हमने स्कूल में प्रोजेक्टर और ३० टैब खरीदे। इंटरनेट भी लगवाया। स्कूल में पहली से लेकर सातवीं के लगभग १५० विद्यार्थी स्कूल में पढ़ रहे हैं। इन सभी को बारी-बारी से टैब पर पढ़ाया जाता है। प्ले स्टोर पर उपलब्ध सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षा के कई ऐप्स की मदद से विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। बच्चे उर्दू की पढ़ाई और लिखाई भी ऐप पर ही करते है। विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को डिजिटल पढ़ाई खूब भा रही हैं। बता दें कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित  एमएमआरडीए के मैदान में ‘शिक्षणवारित’ (शिक्षा प्रदर्शनी) का आयोजन किया गया था। इस प्रदर्शनी में राज्य के कई स्कूल के शिक्षकों ने हिस्सा लिया है, वहीं राज्य के पहले डिजिटल उर्दू स्कूल लोगों के आकर्षण केंद्र बना हुआ था।