राज बब्बर का बच गया ताज, हालांकि यूपी कांग्रेस के ८०फीसदी कार्यकर्ता विरोध

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के ८० फीसदी कार्यकर्ता अपने प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को पसंद नहीं करते हैं लेकिन फिर भी राज बब्बर का प्रदेश अध्यक्ष का ताज अभी भी बचा हुआ है। वजह यह है कि कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के मुद्दे पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच किसी एक नाम पर सहमति बन पा रही है।
बता दें कि यूपी में पिछले तीन दशक से वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस में जान फूंकने के लिए पार्टी आलाकमान ने प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रभारी बनाकर भेजा है। दोनों नेताओं ने सूबे के सियासी मिजाज और संगठन की नब्ज को समझने के लिए चार दिन लखनऊ में रुककर एक-एक लोकसभा सीट के पार्टी कार्यकर्ता से बातचीत की। बताया जा रहा है कि प्रियंका और ज्योतिरादित्य के समक्ष कांग्रेस के ८० फीसदी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राज बब्बर को हटाने की मांग की। कार्यकर्ता चाहते हैं कि सूबे में पार्टी की कमान ऐसे शख्स को सौंपी जाए, जो प्रदेश के गांव से लेकर ब्लॉक और जिले तक के जमीनी कार्यकर्ताओं से वाकिफ हो तथा जातीय और राजनीतिक समीकरण में भी फिट बैठता हो। कार्यकर्ताओं का कहना था कि राज बब्बर बेहतर चुनाव प्रचारक और भीड़ जुटाऊ नेता हो सकते हैं लेकिन सूबे के संगठन के मुखिया के तौर पर वे सक्षम व्यक्ति नहीं हैं।

राहुल-प्रियंका दोनों की पसंद अलग-अलग
कार्यकर्ताओं की मांग पर प्रियंका-ज्योतिरादित्य ने सूबे में पार्टी की कमान किसी ब्राह्मण समुदाय के नेता को सौंपने की राय दी। लेकिन यूपी में नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम को लेकर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने युवा चेहरे के तौर पर जितिन प्रसाद और ललितेशपति त्रिपाठी में किसी एक को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के लिए नाम सुझाया। जबकि प्रियंका गांधी ने प्रमोद तिवारी को बनाने के पक्ष में अपनी बात रखी। प्रियंका का मानना है कि प्रमोद तिवारी के सपा-बसपा से भी बेहतर रिश्ते लाभ गठबंधन बनाने में कांग्रेस को मिलेगा।