रामपुर का गब्बर, ऐसा कोई बचा नहीं जिसे आजम ने ठगा नहीं

 दर्ज हो सकती है ५० से ज्यादा एफआईआर
 यतीमखाने पर चलवाया था बुलडोजर
 ४२ परिवार सड़कों पर रहने को मजबूर

आजम को अपने रहनुमा के रूप में आजमाने वाले मुसलमान आज अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। कुछ किसानों के मामला दर्ज करवाते ही शिकायत दर्ज कराने वालों की कतार ही लग गई है। उम्मीद है कि ५० से ज्यादा किसान अगले एक-दो दिनों में मामला दर्ज कराएंगे। जबकि ये तो छोटे किसान हैं जो आगे आए हैं और मामला दर्ज करवा रहे हैं। जमीन खोने वाले बड़े किसानों का सामने आना अभी बाकी है। मुसलमानों का हितैषी होने का दंभ भरनेवाले आजम खान की पोल रामपुर के मुसलमानों ने ही खोल दी है। मुसलमानों के रहनुमा बनने का ढोंग रचनेवाले इस सपा नेता ने किसी माफिया की तरह गरीबों का दमन किया। अपनी ऊंची रसूख की बदौलत आजम खान ने न सिर्फ मुसलमानों की जमीनें हड़पीं बल्कि उन पर मामले भी दर्ज करवाए। जिसने भी विरोध किया, उसे शोले फिल्म के ‘गब्बर’ की तरह सजा दी। गरीब-लाचार मुसलमान आजम खान की बर्बरता सहते रहे। तत्कालीन सपा सरकार में आजम के खिलाफ किसी की बोलने की हिम्मत नहीं थी। आजम ने कभी कब्रिस्तान से मिट्टी खुदवा ली, कभी यतीमखाने पर बुलडोजर चलवा दिया। किसी ने चूं तक नहीं की। जिस मुसलमान किसान ने जौहर यूनिवर्सिटी को जमीन देने में आनाकानी की, उसे अपने मित्र और तत्कालीन सीओ रामपुर आले हसन के माध्यम से मजबूर कराया तथा येनकेन प्रकरेण जमीन हथिया ली। रामपुर के इस ‘गब्बर’ ने किसी को नहीं बख्शा, हर किसी को ठगा। ़जौहर विश्वविद्यालय के नाम पर ४०० एकड़ जमीन ली गई है।
आजम खान के ‘जौहर’ में किसान लुटे तो यतीम भी पिस गए। इसी जौहर के अत्याचार के शिकार हुए ४२ यतीम परिवार आज भी मारे-मारे फिर रहे हैं। रामपुर के यतीमखाने में ४२ परिवार रहते थे। आरोप है कि १४ अक्टूबर २०१६ की रात में आजम ने जमीन हड़पने के लिए यतीमखाने पर बुलडोजर चलवा दिया। आजम के लोगों ने वहां रहने वाले परिवारों सामान निकालकर सड़क पर फेंक दिया। हम लोगों के सामने ही हमारा आशियाना उजाड़ दिया गया, वहीं दूसरे भुक्तभोगी पीर बख्श बताते हैं कि वह काली रात हमें कभी नहीं भुलेगी। आजम ने घर तोछीना ही उल्टे हमारे ऊपर सीओ आले हसन से कह कर मुकदमा भी दर्ज करवा दिया था हम डर के मारे भागे-भागे फिर रहे थे। यतीमखाने की १० एकड़ जमीन आजम खान ने हड़प ली है जबकि यतीमखाने को बनवालेवाले रामपुर के नवाब ने अपनी वसीयतनामें में लिखा है कि हमारे परिवार का कोई सदस्य किराया नहीं लेगा। जो किराया आएगा, उसे यतीमों पर ही खर्च करना है। पीर ने आगे कहा कि उसी यतीमखाने को आजम हड़प गए। कागजों और नियमों में हेरफेर करके आजम ने यह काम किया।
नहीं था सरकार का डर
यूपी राजनीति के चाणक्य बताते हैं कि जब २०१२ में सपा ने पूर्ण बहुमत हासिल किया तो मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को सीएम बनाया था। सीएम बनाते समय मुलायम ने अखिलेश के सामने कुछ शर्तें रखी थीं। उन्हीं में से एक शर्त यह भी थी कि चाचा लोगों (शिवपाल यादव, आजम खान) के काम में दखलअंदाजी नहीं करोगे। २०१२ से २०१७ तक आजम खान मनमानी करते रहे और अखिलेश यादव कुछ बोल नहीं पाए। उस दौरान भी एक आरटीआई कार्यकर्ता ने अखिलेश से आजम की शिकायत की थी पर कुछ कार्रवाई नहीं की गई। आजम खान को किसी का डर नहीं था। ऊपर से जौहर विश्वविद्यालय का नाम। आज भी आजम बड़े भोलेपन से कहते हैं कि मैंने किसी की जमीन नहीं ली है। जो भी जमीन ली गई वह विश्वविद्यालय के लिए ली गई है। मैं तो आज भी एक गली के छोटे से मकान में रहता हूं।
विवादों से पुराना नाता
९ बार से लगातार विधायक रहे और वर्तमान में सांसद आजम खान का विवादों से पुराना नाता है। वे हमेशा विवादित बयान तो देते ही हैं साथ ही कई ऐसी गतिविधियों को भी अंजाम देते हैं, जिसके चलते उनके ऊपर मामले दर्ज हो जाते हैं। उन पर सबसे पहला मामला वर्ष १९८२ में दर्ज हुआ था। आज उनके ऊपर कुल ३६ आपराधिक मामले दर्ज हैं। अपनी भैंस को लेकर भी एक बार वो सुर्खियों में था। भैंस गायब होने के बाद पुलिस की पूरी टीम को उन्होंने उसे खोजने पर लगा दिया था।