रामभक्तों को गुमराह किया जा रहा है

२०१९ चुनाव की तैयारी को लेकर एक बार फिर भाजपा राम के नाम पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। चुनाव में इस बार विश्व हिंदू परिषद, संघ के साथ संत समाज को भी शामिल किया गया है, जिसके लिए राम मंदिर को लेकर देशभर में धर्मसभा के नाम से आयोजन किया जा रहा है। रामभक्तों को गुमराह किया जा रहा है। इन शब्दों में रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने संताप व्यक्त किया है।

रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि राम मंदिर को लेकर धर्मसभा दिल्ली में हो चुकी है और इसका कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। राम मंदिर के लिए कोई ठोस कदम उठाया नहीं जा रहा। विश्व हिंदू परिषद लोगों को गुमराह करके संतों के नाम से सभा कर रही है। चुनाव नजदीक आते ही विश्व हिंदू परिषद द्वारा संतों के माध्यम से २०१९ में एक बार फिर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए ये सभी धर्म सभाएं की जा रही हैं। राम भक्तों को गुमराह कर राजनीति की जा रही है। विश्व हिंदू परिषद भाजपा के पुराने प्रचारक के रूप में रही है और २०१४ में भी विश्व हिंदू परिषद ने राम के नाम को लेकर भाजपा को सत्ता दिलाई थी और अब २०१९ में देश में राम मंदिर को लेकर बदले माहौल को देखते हुए देशभर में इस तरह की बैठक की जा रही हैं। इस बैठक का सिर्फ राजनीतिक उद्देश्य है और राम मंदिर के लिए इसका कोई निष्कर्ष निकलनेवाला नहीं है।

वहीं बाबरी मस्जिद विवाद के मुख्य मुद्दई इकबाल अंसारी ने इस धर्मसभा को लेकर बताया कि जैसे चुनाव की शुरुआत होती है, लोग जाति-धर्म की राजनीति करने लगते हैं। नाम सिर्फ धर्म का होता है लेकिन यह पूरा कार्य सियासत के लिए किया जाता है। आज देश में राजनीति विकास के नाम पर होनी चाहिए लेकिन सिर्फ अब धर्म के नाम पर राजनीति की जा रही है। देश में कोई भी धर्म खतरे में नहीं है। देश में जहां हिंदू समाज पूजा-पाठ करता है, वहीं मुस्लिम समाज के लोग भी अपनी दुआएं व नमाज मस्जिदों में कर रहे हैं और ये लाखों की भीड़ सिर्फ राजनीति के लिए है। देश की जनता से अपील करते हुए अंसारी ने कहा कि इस तरह के राजनीतिक बहकावे में न आएं और न ही कहीं जाने की आवश्यकता है। आज देश का नुकसान धर्म-जाति की राजनीति के कारण हो रहा है। देश में विकास और रोजगार जरूरी है लेकिन आज देश की जनता सब समझ रही हैै।