राममंदिर पर मध्यस्थता कराए जाने को लेकर नई चर्चा शुरू

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोध्या के राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मध्यस्थता कराए जाने का निर्णय आने के बाद अब कोर्ट के फैसले पर नई चर्चा शुरू हो गई है । इस मामले को लेकर दोनों ही समुदाय के पक्षकारों ने कोर्ट के निर्णय पर अपनी राय कायम की है । अयोध्या से बाबरी मस्जिद मामले के पैरोकार हाजी महबूब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय सहर्ष स्वीकार है और मध्यस्थता के जरिए ही इस विवाद का हल हो सकता है । मध्यस्थता के लिए जिन नामों का चयन किया गया है> वह योग्य है और हमें पूरी उम्मीद और विश्वास है कि मध्यस्थता से इस विवाद का हल हो सकता है ।
वहीं निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता प्रभात सिंह ने मध्यस्तता की सलाह का स्वागत किया है । उन्होंने कहा बातचीत से कई बड़े बड़े मसले हल हो जाते है, कोर्ट की यह पहल अच्छी है। इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद ने भी इस मुकदमे को लेकर मध्यस्तता जैसी किसी व्यवस्था पर विश्वास नहीं जताया है और मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाए ।

वही इस प्रकार की मध्यस्थता करने के लिए आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर का नाम शामिल किए जाने पर भी अयोध्या के संतों ने एतराज जताते हुए कहा कि अयोध्या में शीर्ष साधु संतों की कमी नहीं, न्यास उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा सुप्रीम कोर्ट लगातार इस मामले को लटकाने का काम कर रहा है जिससे करोड़ो हिन्दू जनमानस को ठेस पहुँच रही है, श्री श्री से इस मामले में पड़ने से कुछ नही होने वाला है, और हम किस बात के लिए मुसलमान के घर जा कर समझौता करे । रामजन्मभूमि सिर्फ हिन्दुवों का है । वही हिन्दू पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा जज का ये काम सराहनीय है, क्योंकि इस बार इन्होने समझौता कराने का एक पैनल गठित किया है जो कि अपनी रिपोर्ट अयोधया से लेकर जज का देंगे । उसी आधार पर जज को फैसला करना है। इसका हम स्वागत करते है ।

Byte हाजी महबूब मुस्लिम पक्षकार

Byte न्यास उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास

Byte महंत धर्मदास हिन्दू पक्षकार

Byte राम विलास वेदांती न्यास सदस्य

Byte महंत राजकुमार दास

Byte प्रभात सिंह निर्मोही अखाड़ा