रामलला को फिर तारीख!

पूरे देश की निगाहें कल सुप्रीम कोर्ट की ओर लगी हुई थीं। बड़ी उम्मीद थी कि कल से अयोध्या मामले की रोज सुनवाई शुरू हो जाएगी और रामलला के मंदिर बनने का रास्ता जल्द प्रशस्त होगा। पर सारी उम्मीदें महज ५ मिनट में ही टूट गर्इं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षतावाली ३ जजों की पीठ ने जनवरी २०१९ तक सुनवाई टालते हुए तारीख दे दी। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से राम भक्तों में मायूसी की लहर दौड़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट की नई बेंच कल से नियमित रूप से इस मुकदमे की सुनवाई करनेवाली थी लेकिन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने इस मुकदमे की सुनवाई को जनवरी तक के लिए टाल दिया है। इस पैâसले के आने के बाद जहां हिंदू पक्षकारों में निराशा देखी जा रही है, वहीं मुस्लिम पक्षकारों ने इसे कोर्ट का पैâसला बताते हुए इस पर कोई टिप्पणी करने की जगह इसे स्वीकार करने की अपील की है। कल की सुनवाई को लेकर देश भर की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी थीं और सुनवाई टल जाने के बाद अब पूरे देश से राजनेताओं के अलावा आम लोगों की भी प्रतिक्रिया टीवी चैनल और सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है लेकिन इन सबसे हटकर आम अयोध्यावासी बेहद शांत दिख रहा है। अयोध्या हमेशा की तरह अपनी रफ्तार में है और अयोध्या के लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई टालने और अगली तारीख दिए जाने के बाद संत समाज और हिंदू समाज में बहुत आक्रोश पैâल गया है। संतों का कहना है कि अब सरकार हर हाल में अध्यादेश लाए और मंदिर निर्माण का काम शीघ्र चालू करे। अब विलंब ठीक नहीं है और धैर्य जवाब दे रहा है। प्रतीक्षा करना हमारे बस की बात नहीं है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सत्येंद्र दास ने ‘दोपहर का सामना’ से कहा कि न्यायालय ने निराश किया है। हम नहीं समझते थे कि कोर्ट इतनी लंबी तारीख डालेगा। हिंदू समाज बहुत दिनों से प्रतीक्षा कर रहा है, अब किसी तरह राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर का निर्माण अतिशीध्र होना चाहिए। काशी विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्टी पंडित प्रसाद दीक्षित ने कहा कि २५ नवंबर को शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या आ रहे हैं। कोर्ट को और सरकार को देश की जनता का रुख पता चल जाएगा। उन्होंने कहा की तारीख पर तारीख से हिंदू समाज विचलित हो रहा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो यह मेरी शुभकामना है। दीक्षित ने केंद्र सरकार से अपील की कि राम जन्मभूमि पर यदि पैâसला ऐसे लटकता रहा तो हिंदू समाज और साधु संतों का विश्वास कोर्ट के साथ-साथ सरकार से भी उठ जाएगा। राम मंदिर निर्माण में अब विलंब बर्दाश्त नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ न करे। हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ महंगा पड़ेगा। धारा ३७० व तीन तलाक जैसे मुद्दों पर अध्यादेश लानेवाली सरकार राम जन्मभूमि मंदिर के मुद्दे पर अध्यादेश लाने में क्यों लचर प्रणाली अपनाए हुए है? अयोध्या के महंत मन महेश दास ने कहा कि २५ नवंबर को उद्धव ठाकरे जी आ रहे हैं, उनका अयोध्या में स्वागत है। उन्होंने कहा कि उनके आने से राम मंदिर निर्माण का मार्ग और जल्दी प्रशस्त होगा। उद्धव ठाकरे बहुत सुलझे हुए नेता हैं। वह बहुत समझदारी से इसका समाधान कर मंदिर निर्माण की पहल करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर उन्होंने कहा कि कोर्ट को इतनी लंबी तारीख नहीं देनी चाहिए थी, इससे हम खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मोदी और योगी हिंदू समाज को नाराज नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों मिलकर यह प्रयास करें कि किसी तरह कानून बनाकर २०१९ से पहले राम मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाए। महेश दास ने कहा कि यह सरकार अपनी आवश्यकतानुसार एससी-एसटी एक्ट का अध्यादेश ला सकती है। तीन तलाक पर अध्यादेश ला सकती है लेकिन जिस मुद्दे पर सत्ता में आई, उस धारा ३७० और राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लेकर अभी तक अध्यादेश लाने में टालमटोल कर रही है, यह उसे भारी पड़ेगा।
निर्मोही अखाड़े की ओर से पक्ष रखनेवाले निर्मोही अखाड़े की अयोध्या पीठ के महंत दिनेंद्र दास का कहना है हाई कोर्ट ने पहले भी माना है कि उस स्थान पर भगवान राम का मंदिर था। जो सबूत पेश किए गए हैं उससे स्पष्ट है कि उस स्थान पर भगवान राम का मंदिर था जिसे तोड़ दिया गया और एक नया ढांचा खड़ा कर दिया गया। अब वक्त आ गया है जब सुप्रीम कोर्ट भी हमारे पक्ष में पैâसला सुनानेवाली है और बहुत जल्द ही भगवान रामलला का मंदिर बननेवाला है।
इस मुकदमे के पक्षकारों में राम जन्मभूमि पर खुद के स्वामित्व का दावा करनेवाले महंत धर्मदास का कहना है कि अगर कोर्ट में सुनवाई रोजाना हो तो जल्द ही पैâसला आ सकता है। जब तक कोर्ट का पैâसला नहीं आएगा तब तक कोई भी सरकार कुछ भी नहीं कर सकती। बाकी सारी बातें अनर्गल हैं।
राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर ७ दिनों तक आमरण अनशन करनेवाले तपस्वी छावनी के उत्तराधिकारी महंत परमहंस दास ने भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुकदमे की सुनवाई टाल देने पर निराशा जाहिर की है। परमहंस दास ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि अब जल्द ही इस मामले की सुनवाई शुरू होगी। पहले ही सबूत और गवाहों का दौर बीत चुका है। अब पैâसले का समय है लेकिन सुनवाई टल जाने से हमें घोर निराशा हुई है।