राम प्रभु का अपमान!

हिंदुस्थान में रामराज्य लाने की बात ‘भाजपा’ करती रहती है। यह रामराज्य कैसा होगा, इसका खुलासा अब हुआ है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में बलात्कार और महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। उस पर उपाय करने की बजाय उल्टे बलात्कार की घटनाओं को रोकना प्रभु रामचंद्र के लिए भी संभव नहीं होने की घोषणा भाजपा की तरफ से की गई है। उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह ने ऐसा खुलेआम कहा है। उत्तर प्रदेश में बलात्कार की जो घटनाएं हुई हैं, उसमें भाजपा के विधायक अभियुक्त हैं इसीलिए बलात्कार की घटनाओं को रोकना प्रभु श्रीराम के लिए भी संभव नहीं है, ऐसा सत्ताधारियों को लगता है क्या? हिंदुस्थान में मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण बहुमत का राज आने के बाद भी रामराज्य का निर्माण नहीं हो पाया। अयोध्या के प्रभु श्रीराम वनवास में हैं और राम मंदिर का निर्माण नहीं हो सका है, वो कब बनेगा यह ‘रामराज्य’ वाले भी बता नहीं सकते। बलात्कार होते रहेंगे, ऐसा कहना मतलब राज करना नहीं। दिल्ली में निर्भया बलात्कार कांड हुआ। उस समय विरोध कर रहे आज के सत्ताधारियों की भूमिका अलग थी। कांग्रेस का राज है इसलिए बलात्कार हो रहे हैं और कांग्रेस पार्टी की सत्ता जब तक नहीं जाती तब तक बलात्कार जारी रहेंगे, ऐसा उनका दावा था। निर्भया बलात्कार कांड उस समय चुनाव प्रचार का मुद्दा बनाया गया। बाद में वेंâद्र में राज बदला। कांग्रेस पार्टी सत्ता से नीचे उतर गई। मगर फिर भी बलात्कार थमा नहीं और अब प्रभु श्रीराम को ही भाजपावालों ने गवाह बनाया है। बलात्कार रोकना प्रभु राम के लिए भी संभव नहीं, इसका दूसरा अर्थ ऐसा होता है कि धराशायी कानून और सुव्यवस्था पर हमारा नियंत्रण नहीं है। रावण माता सीता का अपहरण कर ले गया तो श्रीराम कुछ नहीं कर सके। ऐसे में इस कलियुग में वे क्या करेंगे? आज भी कई मातारूपी सीताओं पर रोज ही अत्याचार करनेवाले रावण हैं। उन रावणों को जिन्हें रोकना है, वे सत्ताधारी बगलें झांक रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ‘अच्छे दिन’ लाएंगे, ऐसा वादा था लेकिन महंगाई से लेकर काले धन तक एक भी ‘वादा’ पूर्ण नहीं हुआ। लोगों से गप हांककर फिर से ही दोबारा राज लाने की नीति को ही चाणक्य नीति कहना होगा तो आखिर ऐसा वैâसे होगा? उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण बने हैं और यह मोदी और शाह के लिए मुसीबत की घंटी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य कल को राजनीतिक भविष्य तय करनेवाले हैं लेकिन इन राज्यों की मानसिकता अब बदल रही है। सभी बातें पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं तथा महिलाओं की इज्जत इस तरह हवा में नहीं उड़ाई जा सकती। मीठा बोलने से लोगों की रोजी-रोटी का सवाल हल नहीं होगा। भावनात्मक विषयों को जब छेड़ा जाता है तब सीधे-सीधे दंगों को आमंत्रण दिया जाता है। राजनीति इसी तरीके से ही करें और चुनाव जीतें, ये प्रभु श्रीराम ने नहीं कहा है। चाणक्य का भी वह सूत्र नहीं था। जिस राम मंदिर के लिए अयोध्या में खून की नदियां बहीं, वह राम सभी राज्यों से गुम हो गया है। राम पर निर्भर मत रहो, वे अबलाओं की इज्जत की रक्षा नहीं कर सकते, ऐसा भाजपा नेताओं ने चेताया है। फिर अब करें क्या? बलात्कार विकृति है लेकिन इसलिए सबकुछ राम भरोसे छोड़ दें क्या? फिर सत्ताधारी के रूप में क्यों शेखी बघार रहे हो? यह प्रभु राम का अपमान है।